भोपाल। वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) प्रचलित मूल्यों पर 1669750 करोड़ रूपये अनुमानित है। वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के 1502428 करोड़ रूपये की तुलना में यह 11.14 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्शाता है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर 169050 रुपये अनुमानित है।
मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में यह आंकड़े सामने आए।
राज्य के उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को कहा मध्यप्रदेश ने दूरदर्शी आर्थिक नीतियों के साथ संतुलित और समावेशी विकास का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में प्रस्तुत आंकड़ों से जाहिर है कि प्रदेश योजनाबद्ध, संतुलित और परिणामोन्मुख विकास पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) प्रचलित भाव पर 1669750 करोड़ रुपए आंका गया है। यह वर्ष 2024-25 के 1502428 करोड़ रुपए की तुलना में 11.14 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार स्थिर (2011-12) भाव पर जीएसडीपी 781911 करोड़ रूपए अनुमानित है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि दर्शाता है।
वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि राज्य में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2011-12 में प्रचलित भाव पर 38497 रुपए रही प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 169050 रूपए हो गई है। स्थिर (2011-12) भाव पर यही आय 76971 रुपए तक पहुंच गई है।
वित्त मंत्री के मुताबिक यह आय स्तर में सुधार का संकेत है, जो जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन को रेखांकित करता है।
वर्ष 2025-26 में प्रचलित भाव पर सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत रहा। स्थिर भाव पर यह संरचना क्रमशः 33.54 प्रतिशत, 26.18 प्रतिशत और 40.28 प्रतिशत रही। इससे जाहिर है कि कृषि आधारित आधार को मजबूती देते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग और सेवा क्षेत्रों में भी संतुलित विस्तार हुआ है।
वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 679817 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्ष के 633532 करोड़ रुपए की तुलना में 7.31 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इस क्षेत्र में फसलें 30.17 प्रतिशत भागीदारी के साथ प्रमुख घटक रहीं। पशुधन, वानिकी, मत्स्य एवं जलीय कृषि तथा खनन एवं उत्खनन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।


