जबलपुर। संकल्प दिवस के अवसर पर श्री गुरु तेग बहादुर खालसा महाविद्यालय में व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के सदस्य डॉ. विश्वास चौहान एवं श्री तेग बहादुर खालसा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आरएस चंडोक के द्वारा किया गया।
संकल्प दिवस में आयोजित व्याख्यान के दौरान उच्चन्यालय के सेवानिवृत न्यायधीश एचपी सिंह, पूर्व उप महाअधिवक्ता एड. विजय पाण्डेय, उच्च शिक्षा विभाग के विशेष कर्तव्य अधिकारी डॉ. अजय गुप्ता मौजूद रहे।
स्वागतीय उद्बोधन में श्री तेग बहादुर खालसा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आरएस चंडोक ने सभी का हार्दिक अभिनंदन करते हुये कहा कि स्वतंत्रता के समय उपजी विसंगतियों का क्रमश: निराकरण होता जा रहा है। आज भारत विकसित भारत की ओर कदम बढ़ाता हुआ विश्व के परिदृश्य पर अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। इसलिये भी यह आवश्यक हो जाता है कि आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करते हुये सभी विवाद का हल भी होना चाहिये।
मुखर वक्ता डॉ. विश्वास चौहान ने जम्मू कश्मीर और लदाख के परिदृश्य को समझाते हुए कहा कि किस प्रकार हमारे भारत वर्ष के अहम हिस्से पर पड़ोसी देशों द्वारा कब्जा किया गया है। इसको भारत में वापिस मिलाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आगामी चुनाव में हमे ऐसी सरकार फिर से लानी होगी जो भारतीय संसद के देश हित मे लिए गए संकल्प को पूरा कर पीओजेके को पाकिस्तान से वापिस लेने का कार्य करे। उन्होंने आगे कहा कि हम सभी युवा इस अवसर पर संकल्प लेते हुए इस कार्य के लिए समर्पित होते हुए कार्य करेंगे।
एड. विजय पाण्डेय ने लद्दाख परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के पूर्व किस प्रकार यह हमारी संस्कृति को एक माला में पिरोकर रखा गया था, जिसे स्वतंत्रता के पश्चात उसे बिखेर कर अलग अलग करने का प्रयास किया गया।
डॉ. अजय गुप्ता ने कहा कि भारत के इतिहास की वास्तविक स्थिति को आज के पाठ्यक्रम में सम्मिलित करना आवश्यक है, जिससे आज के युवा को हमारी संस्कृति और इतिहास का सही जानकारी हो।
एचपी सिंह द्वारा वक्तव्य में कहा गया कि वास्तविक स्थिति का आकलन कर हम लोग वहां के रहवासी के लिए कार्य कर रहे है, जिससे उन्हें भी भारत के प्रति राष्ट्रवाद की मुख्य धारा में जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. हर्षिता शुक्ला द्वारा किया गया।
इस दौरान महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक एवं विद्यार्थी शामिल रहे।


