मप्र के ढ़ेड लाख शिक्षकों को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी की अनिवार्यता पर कहा- अब आगे कोई छूट नहीं मिलेगी

DR. SUMIT SENDRAM

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई की है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि टीईटी परीक्षा में दी जाने वाली सभी आवश्यक छूट पहले ही दी जा चुकी हैं। अब आगे कोई अतिरिक्त रियायत नहीं मिलेगी।
कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षकों के लिए एक राहत भरा फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक केवल वे शिक्षक जिनकी सेवा के अब 5 वर्ष या उससे कम शेष हैं, उन्हें टीईटी परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। अन्य सभी शिक्षक, जिन्होंने अब तक यह परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें पात्रता साबित करनी होगी।
यह आदेश उन शिक्षकों पर लागू होता है जिनकी नियुक्ति 1998 से 2009 के बीच हुई थी।
गौरतलब है कि 1 सितंबर 2025 के पिछले आदेशानुसार जो शिक्षक इस अवधि में नियुक्त हुए हैं और परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार से शिक्षकों का विस्तृत डेटा मांगा है।
अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह के अनुसार कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पूर्व शिक्षकों की एक श्रेणीवार सूची प्रस्तुत की जाए।
इसमें सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों की सटीक संख्या स्पष्ट होनी चाहिए।
बता दें कि मध्य प्रदेश में लगभग 1.50 लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं की है, उनके भविष्य के लिए यह फैसला निर्णायक साबित होगा।

 

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