धार। जिले के बाग क्षेत्र में प्रस्तावित डायनासोर पार्क को लेकर एक बार फिर हलचल शुरू हो गई है। वन विभाग वर्तमान में प्रस्तावित नेशनल पार्क के लिए प्रबंधन योजना तैयार कर रहा है।
राष्ट्रीय उद्यान को लेकर जिला स्तर पर रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसी आधार पर आगे के सभी विकास कार्य और संरक्षण गतिविधियां संचालित होंगी।
दरअसल, योजना को लेकर उच्च स्तर पर ही काम हो रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर फिलहाल कुछ भी विकास नजर नहीं आ रहा है।
क्षेत्र के लिए यह योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हाल ही में संभाग आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने इसो लेकर वन विभाग के आला अधिकारियों के साथ वर्चुअली बैठक ली। इसमें कयास लगाए जा रहे कि लंबे समय से लंबित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अब अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
पार्क के विकास और योजना के क्रियान्वयन से क्षेत्र में पर्यटन, वैज्ञानिक शोध और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। 100 करोड़ से अधिक की इस विकास योजना में अत्याधुनिक संग्रहालय और ओपन फासिल जोन प्रस्तावित है।
बता दे कि डायनासोर पार्क और प्रस्तावित नेशनल पार्क के माध्यम से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और आसपास के गांवों के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। स्थानीय लोगों में भी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर उत्साह है। लोगों का मानना है कि डायनासोर पार्क बनने से बाग का नाम देश-दुनिया में पहुंचेगा और यह क्षेत्र पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान प्राप्त करेगा। फिलहाल सभी की निगाह विभागीय और कैबिनेट स्वीकृति पर टिकी हुई है, जिसके बाद इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का रास्ता पूरी तरह साफ हो सकेगा।
जिला वन मंडल अधिकारी विजय मंथन टीआर ने बताया कि डायनासोर पार्क 89 हेक्टेयर में ही बनेगा। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। फिलहाल इसे विभागीय स्वीकृति मिलना बाकी है। विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्ताव राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी।
उन्होंने कहा कि इको-सेंसिटिव जोन का उद्देश्य पार्क के आसपास के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है। इससे स्थानीय निवासियों के रोजमर्रा के कार्यों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। केवल ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित किया जाएगा, जो क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसकाे लेकर वन विभाग के आला अधिकारी बाग का दौरा कर चुके हैं और परियोजना को लेकर लगातार व्यक्तिगत रुचि ले रहे हैं। यह परियोजना बाग क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती है।


