भोपाल। मध्यप्रदेश बोर्ड के 10वीं व 12वीं परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में मूल्यांकनकर्ता शिक्षक मनमानी नहीं कर पाएंगे। वें किसी भी विद्यार्थी को मनमाने ढंग से अंक नहीं दे पाएंगे, क्योंकि इस बार सभी उत्तरपुस्तिकाओं में बारकोड लगे हैं। इससे किस विद्यार्थी की उत्तरपुस्तिका है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाएगी। इसमें रोल नंबर की भी पहचान नहीं हो पाएगी। इस बार परीक्षा से लेकर मूल्यांकन कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने काफी प्रयास किए हैं। पिछले साल तीन विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं में बारकोड लगे थे। इस बार सभी विषयों में लगाए गए हैं।
इसके अतिरिक्त उत्तरपुस्तिकाओ में ओएमआर शीट भी है। इससे किस विद्यार्थी की कापी है, यह जानकारी मूल्यांकनकर्ता को नहीं मिल सकेगी।
इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 22 फरवरी से मूल्यांकन कार्य शुरू होगा।
इस वर्ष लगभग 17 लाख विद्यार्थियों की एक करोड़ 10 लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
मूल्यांकन कार्य में प्रदेश के 25 हजार और भोपाल जिले से 1800 शिक्षकों को लगाया जाएगा।
अगर किसी विद्यार्थी के शून्य या 99 अंक आएंगे तो उसकी उत्तरपुस्तिका तीन बार जांची जाएगी। विषय शिक्षक के बाद उप मुख्य परीक्षक व मुख्य परीक्षक भी इनकी कापियों को जाचेंगे। एक शिक्षक अधिकतम 30 या 45 उत्तरपुस्तिका ही जाचेंगे। इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा कि जल्दबाजी में मूल्यांकन ना हो। अगर उत्तरपुस्तिका को जांचने में एक गलती भी सामने आती है तो उस पर 100 रुपये प्रति गलती के हिसाब से जुर्माना भी लगेगा।
माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारियों के मुताबिक भोपाल जिले के विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन अन्य जिले में कराया जाएगा। पेपर खत्म होते ही कापियों के बंडल बनाकर समन्वयक केंद्रों में भेजे जा रहे हैं। प्रत्येक केंद्र में रोज ढाई से तीन हजार उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराने का लक्ष्य रखा गया है।
मंडल के निर्देश हैं कि कापियां जांचने का काम पूरी पारदर्शिता और तेजी से किया जाए। मूल्यांकन कार्य मार्च के अंतिम सप्ताह तक समाप्त होगा। इसके बाद रिजल्ट बनाने की तैयारी शुरू होगी। मूल्यांकन खत्म होने के साथ ही विद्यार्थियों के अंक भी तुरंत पोर्टल पर अपलोड करना है। उसके आधार पर रिजल्ट बनाया जाएगा।


