सीधी। कोचिंग सेंटर्स की मनमानी को लेकर सरकार सख्त हो गई है।
केंद्र की नई गाइडलाइन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज प्राचार्यों एवं विश्वविद्यालय कुलसचिव को निर्देश जारी किया है।
नए आदेश में अब कोई कोचिंग संस्थान बिना पंजीयन नहीं खुलेगा। इसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों को दाखिला भी नहीं मिलेगा। मनमानी फीस वसूली पर जेल के भी प्रावधान है।
कोचिंग संस्थानों की निगरानी के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के
विश्वविद्यालयों के कुलसचिव और स्कूल, कॉलेज प्राचार्यों को जिम्मेदारी दी है।
जिले में 150 से अधिक कोचिंग सेंटरों में एक लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनमें से 40 फीसदी संस्थान ऐसे हैं जहां स्कूल की ही तरह चार-चार घंटे कक्षाएं लगाई जाती हैं। इसके अलावा नियमों की भी अनदेखी की जाती है।
दिशा निर्देश में आईआईटी-जेईई, नीट, एमबीबीएस कोर्स में सुरक्षा संबंधी एनओसी अनिवार्य किया गया है।
अक्सर देखा जाता है कि कोचिंग सेंटर के पास फायर और भवन सुरक्षा सम्बंधी एनओसी नहीं होती हैं।
गाइडलाइन के अनुसार किसी भी हालात में स्कूलों या संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की टाइमिंग के दौरान कोचिंग कक्षाएं नहीं चलेंगी। एक दिन में पांच घंटे से अधिक कक्षाएं नहीं चलेंगी। सुबह अर्ली मार्निंग और लेट नाइट क्लास नहीं होंगी। छात्रों और शिक्षकों को वीक ऑफ मिलेगा। त्योहारों में कोचिंग सेंटर छात्रों को परिवार के साथ जुड़ने और भावनात्मक लगाव को बढ़ाने का मौका देंगे।
कोचिंग सेंटर्स को गाइडलाइन के अनुरूप रजिस्ट्रेशन न कराने और नियम और शर्तों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना देना होगा। पहले उल्लंघन पर 25 हजार, दूसरी बार एक लाख और तीसरी बार अपराध के लिए रजिस्ट्रेशन कैंसिल होगा और भारी जुर्माना भी देना होगा।
गाइडलाइन के अनुसार कोर्स की अवधि के दौरान फीस नहीं बढ़ाई जा सकेगी। किसी छात्र ने पूरा भुगतान करने के बावजूद कोर्स के बीच में छोड़ने का आवेदन किया है तो पाठ्यक्रम की शेष अवधि की फीस लौटानी होगी। कोचिंग संस्थान अब विद्यार्थी या उनके पालकों को रैंक या अच्छे अंक की गारंटी भी नहीं देंगे।


