सीधी। जिले भर में अवैध कबाड़ का धंधा दिनों दिन फल-फूल रहा है। हर महीने करोड़ों का कारोबार कबाड़ के अवैध ठिकानों से हो रहा है। पुलिस थाने अपने-अपने क्षेत्र में संचालित कबाड़ कारोबारियों से हर महीने सुविधा शुल्क वसूलकर पूरी मनमानी की छूट प्रदान कर रहे हैं।
जिला मुख्यालय समेत कस्बाई क्षेत्रों में अवैध कबाड़ का गोरखधंधा चरम पर है। बहरी, मझौली, सिहावल, चुरहट, रामपुर नैकिन के अलावा कई छोटे कस्बों में भी कबाड़ का कारोबार बेरोंक-टोंक चल रहा है। थाना से लेकर निगरानी से जुड़े अन्य अमले के साथ कबाडिय़ों की जबरदस्त सेटिंग होने के कारण उनके प्रति किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं होती है। थाने से लेकर सारी जगह उनकी जुगाड़ पानी से ही काम चल जाता है। इन दिनों कबाड़ का अवैध कारोबार पूरे जिले में जोरों पर है।
जानकारों की मानें तो जगह-जगह कबाड़ी सक्रिय हैं, जिन्हें प्रशासन का कोई खौफ नहीं है। यही कारण है कि ये कबाड़ी चौबीसों घंटे शासन-प्रशासन और जनता को चूना लगा रहे हैं। इस बात से जनता काफी परेशान है, क्योंकि सार्वजनिक जगहों से जरूरत की चीजों को क्षति तो पहुंचाया ही जाता है, साथ ही लोगों की निजी संपत्तियों की भी चोरी हो जाती है, जो चोरों द्वारा कबाडिय़ों को ही बेंचा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि नगर में कबाड़ व्यवसाय पर अंकुश नहीं लग पा रही है, जिससे लोगों के नवनिर्मित भवनों, सार्वजनिक स्थलों में लोग अपनी जरूरत की चीजों पर हाथ साफ करने में इन दिनों चोर और कबाड़ी दोनों सक्रिय हैं। जिसके कारण चोर लोहे, तांबे और प्लस्टिक के सामानों को चुरा कर कबाडिय़ों को बेच देते हैं।
सीधी शहर में ही सार्वजनिक जगहों में लगे लोहे की चीजों को काटकर क्षति पहुंचाया जा रहा है। इस समय जिले में कबाड़ी अपने अवैध कारोबार को खूब फैला रखें हैं, उनके इस कार्य में अंकुश न लगने पर ऐसा प्रतीत होता है कि शायद पुलिस प्रशासन की अंदरूनी सहमति मिली हुई है। यही कारण है कि पुलिस के नाक के नीचे कबाड़ी धड़ल्ले से काम को अंजाम देतेे हैं।
ज्यादातर कबाड़ी शहरी एवं कस्बाई क्षेत्रों के आसपास सक्रिय है। इनके खेल को रात के समय क्षेत्रों में देखा जा सकता है, जहां चोरी के कीमती सामानों को लाकर कबाडिय़ों को सौंपा जाता है। वही, कुछ चोरो के द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों से काफी अधिक मात्रा में और मंहगा स्क्रैप लाया जाता है।
एक अनुमान के मुताबिक तॉंबे के तार की कीमत लगभग 800 रूपए किलो होती है। चोर और शराबी प्रवृति के लोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बीएसएनएल के वायरों एवं केबिल को उखाड़कर लाते हैं और आधी कीमत पर कबाडिय़ों को बेंच देते हैं। वहीं, पुलिस द्वारा इनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं की जा रही, जिससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि इन्हे मूक सहमति मिली हुुई है।
इस कार्य से राजस्व को हर महीने लाखों का चूना लग रहा है, साथ ही जिन उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक जगहों पर निर्माण कार्य कराया जाता है, वह पूरा नहीं हो पाता और उसका रूप विकृत होने के साथ ही वह उपयोगहीन साबित हो जाता है।
बता दे कि सीधी शहर में अकेले ही दो दर्जन से ज्यादा कबाड़ के बड़े ठिकाने संचालित हो रहे हैं, जिनमें लाखों का माल रोजाना पहुंचता है। कबाडिय़ों के ठिकाने में चोर गिरोहों द्वारा कीमती लोहे, पीतल, तांबा की सामग्री तक पहुंचाई जाती है। कबाड़ कारोबारी चोरी का माल भांपकर इसे काफी कम कीमत में खरीद लेते हैं बाद में इन्हें बाहर ले जाकर कई गुना ज्यादा दामों में बेंच देते हैं।
जानकार सूत्रों के अनुसार कबाडिय़ों के ठिकाने में मंहगे मशीनरी पार्ट्स भी पहुंच रहे हैं जिसको अपनी सुविधा के अनुसार ठिकाने लगाया जा रहा है।
शहर में कबाड़ के बड़े ठिकाने स्टेडियम के समीप, आजाद नगर, वनमण्डल कार्यालय के पीछे, चिकान मुहल्ला, बेलबाग, मड़वास रोड आदि जगहों पर संचालित हैं, जहां रोजाना का कारोबार लाखों रूपयों का है। कबाड़ी अपने यहां से कीमती सामानों को रात के समय बड़े वाहनों में नीचे छिपाकर लोड करा देते हैं, जो बाहर जाकर कई गुना ज्यादा मंहगे दामों में बिकते हैं।
सीधी शहर में करीब एक दर्जन कबाड़ के व्यवसाय से जुड़े व्यवसाइयों की गिनती करोड़पतियों में होती है। उनके ठिकाने पर पुलिसकर्मियों की आवाजाही भी सुविधा शुल्क वसूली के लिये लगातार बनी रहती है। साथ ही थाना में भी मोटा नजराना हर महीने पहुंचाया जाता है।


