इंदौर। इन दिनों बंगाल एवं महाराष्ट्र में बेटियों से दुष्कर्म के बाद पूरा देश गुस्से में है।
आरोपियों को सख्त सजा देने के साथ लोगों की मांग है कि बेटियों को आत्मरक्षा का कौशल सिखाया जाए।
इंदौर की पलक आनंद पिछले दो सालों से बेटियां को निशुल्क तलवारबाजी, दंड और पटा चलाना सीखा रही हैं। अपने पति की मौत के बाद पलक ने समाजसेवा का संकल्प लिया और आज वे प्रेरणा की मिसाल बन गई हैं।
पलक अब तक 365 महिला-बच्चियों को शस्त्र चलाना सिखा चुकी हैं, जिनमें पांच साल की बच्ची से लेकर 55 साल की महिलाएं शामिल हैं। इनका मानना है कि बेटियों को इस काबिल बनाना है कि वे अपने साथ परिवार की रक्षा भी कर सकें।
पलक ने बताया कि मेरे पति अपने बेटी को आत्मरक्षा सिखाने के लिए कहते थे। बाद में जब मैंने इसकी जरूरत समझी तो केवल अपनी बेटी नहीं, बल्कि सभी बेटियों को सशक्त बनाने के लिए सोचा, ताकि अपनी और किसी की बेटी पर कोई आंच नहीं आए।
साल 2021 में पति के जाने के बाद पलक इस चीज को स्वीकार नहीं कर पा रहीं थीं। इसके बाद उन्होंने “आनंद है” नाम से संस्था खोला। लोग पलक से कहते थे कि अब आनंद इस दुनिया में नहीं हैं। पलक इस बात को अस्वीकार करती रहीं। पलक हमेशा मानती थीं कि आनंद हमेशा उनके साथ हैं। इस बात को साबित करने के लिए संस्था का पूरा “आनंद है” रख दिया। इस वाक्य से आनंद हर समय उपस्थित महसूस होते हैं।
पलक ने बताया कि कई जगहों पर पति की मृत्यु के बाद महिला को अछूत समझा जाता है। कुछ दिनों तक उसे कोई छूता नहीं है। कोई बात नहीं करता है। एकांत में रख दिया जाता है। मैंने नानी और मां आदि लोगों को इस कुप्रथा का शिकार होते देखा था। वहीं मेरे पति के जाने के बाद मैं भी अछूती नहीं रही।
पलक के अनुसार इसके बाद मैंने सोचा कि अन्य महिलाओं को इस कुप्रथा का शिकार नहीं होने दूंगी। इसके लिए मैंने लोगों को जागरूक करना शुरू किया कि इस प्रथा से पति की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। इस प्रथा से किसी का भला नहीं होगा। तब कई लोग इस कुप्रथा को छोड़ने के लिए जागरूक हुए।

