मिड डे मील में घोटाला, प्रधान पाठक की बहन के खाते में जमा हो रहा था रसोईया का वेतन

DR. SUMIT SENDRAM

बालाघाट। जिले के जनपद शिक्षा केंद्र परसवाड़ा अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला दलवाड़ा में मध्याह्न भोजन बनाने वाली रसोईया सीता बाई तेकाम को 11 माह का मानदेय अभी तक नहीं मिला हैं।
मामले की शिकायत शिक्षा विभाग, जिला पंचायत सीईओ, जनपद सीईओ, सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी के अलावा कलेक्टर की जनसुनवाई में की गई। जिसकी जांच होने पर रसोईया का वेतन स्कूल के प्रभारी प्रधानपाठक की बहन के खाते में जमा होना सामने आया है, लेकिन अभी तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है और ना ही रसोइया को मानेदय अभी तक दिया गया है।
रसोईया सीता बाई पति सुखे सिंह तेकाम 38 ने बताया कि एक जुलाई 2009 से स्कूल में मध्याह्न भोजन का कार्य कर रही थी। उसे काम से हटाया दिया गया है और 11 माह का मानदेय अभी तक नहीं दिया गया है। जिससे उसे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रभारी प्रधानपाठक अनिता क्षीरसागर से मानदेय के संबंध में जानकारी चाही तो उन्हें जातिगत रूप से अपमानित कर रसोइया के कार्य में आने से मना कर दिया।
वही, दूसरी रसोईया मथुरा बाई मर्सकोले जिनकी नियुक्ति उनके बाद हुई थी, जिसे कार्य पर रखा गया है। सीता बाई को बच्चों की संख्या कम होने पर भोपाल से फोन आने का हवाला देकर कार्य से बंद कर दिया।
भोपाल से फोन नंबर की जानकारी लेने पर जनपद शिक्षा केंद्र परसवाड़ा के नरेंद्र शरणागत (बीएसी) एमडीएम प्रभारी का पाया गया। जिसमें सामने आया कि प्रधानपाठक ने अपनी सुनीता बाई पति दोहाराम राहंगडाले के नाम से फर्जी प्रस्ताव तैयार कर रसोईया का मानदेय भुगतान कर प्रधानपाठक व बीएसी दोनों के आपसी मिलकर 44 हजार रुपये की शासकीय राशि का गबन किया गया।
सुनीता बाई के नाम से रसोईया की राशि डाली गई है वह महिला ग्राम दलवाड़ा की नहीं है, बल्कि ग्राम चनई खलौंडी की हैं। जबकि, सुनीता पिता दोहाराम राहंगडाले को स्कूल में कार्य करते किसी ने भी नहीं देखा गया और 11 माह की राशि 44 हजार उसके खाते में कैसे डाल दी गई।
मामला सामने आने पर 23 जनवरी 2025 को जिला पंचायत का एक दल निरीक्षण करने स्कूल पहुंचा।
जांच दल ने विभागीय कार्रवाई के दौरान सीता बाई का सबूत प्रधानपाठक अनिता क्षीरसागर से नहीं मांगा गया, जो संदेह घेरे में हैं।
बताया गया कि ग्राम चनई खलौंडी की रहने वाली सुनीता राहंगडाले को स्कूल में कभी कार्य करते नहीं देखा गया। उसके बाद भी खाते में प्रधानपाठक अनिता क्षीरसागर ने अपनी बहन के खाते में 11 माह की राशि डलवा दी। जब सीता बाई तेकाम बीआरसी कार्यालय गई तो वहां उसे कहा गया कि उसके खाते में पैसे जमा हो गए है। बैंक से पता लगाने पर भी कोई राशि जमा नहीं हो पाई थी। जिससे कार्रवाई से बचने के लिए छह मार्च 2025 को जिला पंचायत में यह राशि वापस की गई।
बता दें कि यदि पैसे लौटाए गए है तो मामले की स्पष्ट जांच अभी तक नहीं हो पाई है। क्योंकि किसके कहने पर प्रधानपाठक की बहन सुनीता बाई पति दोहाराम राहंगडाले के खाते में पैसे डाले गए। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानपाठक और बीएसी ने मिलकर शासन की राशि का स्वार्थ साधने की नियत से प्रधानपाठक की बहन के खाते में राशि डलवाए होंगे। मामले की निष्पक्ष जांच होने पर प्रधानपाठक व बीएसी का कारनामा सामने आएगा। रसोईया सीता बाई तेकाम की शिकायत पर हम दो जन शिक्षकों द्वारा जांच किया गया।
जन शिक्षक पीएस मसराम ने बताया कि जांच में पाया गया कि स्कूल की प्रधानपाठक और एमडीएम प्रभारी शरणागत ने रसोइया की मानदेय की राशि को प्रधानपाठक ने अपने बहन की खाते में डाला गया था। जिसकी रिपोर्ट बीआरसी को दे दी गई है। वहीं, जनपद शिक्षा केंद्र परसवाड़ा के बीआरसी अरूण बिठले ने बताया कि रसोइया की शिकायत के संबंध में जांच जारी है। जांच अनुविभागीय अधिकारी परसवाड़ा द्वारा किया जा रहा है। मैं प्राथमिक शाला दलवाड़ा जांच के लिए गया था। जिसका जांच प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को प्रेषित किया जाएगा।

 

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