सिंगरौली। जिले में पर्याप्त बारिश न एवं भीषण गर्मी के चलते भू-जलस्तर लगातार नीचे खिसकता जा रहा है। जिसके चलते जल स्त्रोत नदी, नाले, हैण्डपंप एवं कूप ड्राई होने लगे हैं ऐसा ही मामला देवसर ब्लॉक के ग्राम पंचायत अंतर्गत आदिवासी बिरान टोला का है। जहां इकलौता जल स्त्रोत कुआं ड्राई होने से यहां के रहवासी झरने का पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
दरअसल जिला विगत 3 वर्षों से अल्प बारिश से जूझ रहा है। आलम यह है कि अल्प बारिश का असर जनवरी-फरवरी महीने से ही दिखाई दे रहा था। लेकिन अब इसका असर व्यापक रूप ले लिया है। अल्प बारिश के कारण भू-जलस्तर नीचे खिसक जाने से करीब 30 प्रतिशत जल स्त्रोत नदी, नाले व कूप ड्राई हो चुके हैं। लोगबाग पेयजल के लिए इस 44 डिग्री टेंपरेचर के साथ लम्बा सफर कर रहे हैं। तब उन्हें पेयजल नसीब हो रहा है।
देवसर ब्लॉक के रजमिलान ग्राम पंचायत क्षेत्र के बिरान टोला ने पेयजल संकट गंभीर रूप ले लिया है। आलम यह है कि इस टोले की आबादी करीब आधा सैकड़ा से अधिक है और यहां शत प्रतिशत आदिवासी हैं। जहां जल स्त्रोत का इकलौता कुऑ एक पखवाड़े से ड्राई हो चुका है। जिसके चलते यहां के लोग पटीर नाला में गढ्ढा खोदकर झरने का पानी पीने के लिए मजबूर हैं। यहां के रहवासी बुद्धि राम बैस, रमेश दुबे एवं सियाराम सिंह बताते हैं कि करीब यहां चार-पॉच साल से यहां निवासरत हैं। टोला में एक कुऑ है। वह सूख गई है। गांव के करीब 2.5 किलोमीटर दूर हैं। उसमें से लाल पानी निकलता है। वह पीने योग्य नही है। गर्मी के महीने में इसी झरने से प्यास बुझानी है। यहां तक बताया की इस टोले में शत प्रतिशत आदिवासी निवासरत हैं। अभी तक यहां समुचित पेयजल की व्यवस्था नही की गई है। लिहाजा इसी तरह के जल स्त्रोतों के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ रही है। यहां के आदिवासी ग्रामीणों ने कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट कराते हुये पेयजल की समस्या से निजात दिलाये जाने की मांग की है।


