सिंगरौली। दिन रात एक कर लोगों को सुरक्षा देने वाले अपराधियों से दो-दो हाथ कर अमन चैन कायम करने वाले बेतरतीब यातायात को अपनी मुस्तैदी से सही दिशा देने वाले पुलिसकर्मियों के जब्जे का सम्मान किया जाता है।
जब कोरोना काल में वर्दी के सिपाही एक एक कर चौराहे की ओर खड़े होकर ड्यूटी कर रहे थे, शहर के महिलाएं फूल बरसाकर तालियों से उत्साह बढ़ा रही थी, जोश जुनून का ऐसा अंदाज था जो उन्हें देश सेवा और कानूनराज कायम करने की प्रेरणा दे रहा था।
जब काम की स्थितियां देखते हैं तो खाकी का रुतबा तो दिखता है, पर इसकी पीछे की पीड़ा से बहुत कम लोग परिचित है। पुलिसकर्मियों को ब्लडप्रेशर और कब्ज की शिकायत रहती है, लेकिन कौन पूछता है कब हमने देखा कि उन्होंने होली खेली है, दीपावली पर सब पूजन कर लेते हैं, तब पुलिस बाले पूजा करने जाते है। कितने मनोवैज्ञानिक दबाव में वे रहते हैं, पुलिसकर्मी रातो-दिन 24 घंटे काम करते हैं। रोजमर्रा के जीवन में पुलिस को पहरेदारी आवश्यक है। तेलुगु फिल्म कर्तव्यम का उदाहरण है कि महिलाएं भी पुलिस में अधिकारी बनने के लिए प्रेरित है।


