यूका के कचरे पर सुरक्षा की गारंटी मांगने वाली याचिका को एनजीटी ने किया खारिज

भोपाल। यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को धार जिले के पीथमपुर में जलाने के दौरान किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने की गारंटी मांगने वाली याचिका को राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने खारिज कर दिया।
न्यायाधिकरण ने मध्य प्रदेश सरकार के उस उत्तर को पर्याप्त माना, जिसमें कहा गया कि कचरा जलाने के प्रभावों पर वैज्ञानिक रिपोर्ट पहले ही उच्च और उच्चतम न्यायालय को दी जा चुकी है। जरूरत पड़ी तो वैज्ञानिक रिपोर्ट का सार मीडिया में प्रकाशित करवाया जा सकता है।
बता दे कि जबलपुर के नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव ने गत तीन जनवरी को एनजीटी में याचिका दायर की थी।
इसमें कचरा जलाने से पहले मुख्य सचिव द्वारा एक शपथपत्र पर यह घोषणा करने की मांग की गई कि इस कचरे के जलाने से भूमि, जल और हवा की गुणवत्ता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भोपाल, धार और पीथमपुर के प्रशासनिक अधिकारी भी ऐसा ही शपथ-पत्र दें कि उस क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं होगा। सरकार कचरा जलाने की वैज्ञानिक रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
वही, एनजीटी के न्यायाधीश शेव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद ने 15 जनवरी को हुई सुनवाई के आधार पर फैसला जारी कर दिया।

 

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