सिंगरौली। जिले का बंधा कोल विकासखंड फिर चर्चा में है। कलेक्टर ने कोल कंपनी की आपत्ति के बाद बंधा गांव में बने 3362 फर्जी घरों को अवैध घोषित कर दिया है। देवरी, पचौर, तेंदुहा और पिडरवाह गांवों में बनाए गए पांच हजार से अधिक घर अब प्रशासन की निगाहो में आ गए हैं।
बता दे कि कोल ब्लाक के लिए 776 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इस जमीन पर बनी परिसंपत्तियों के लिए कुल 355.85 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि प्रस्तावित है। वही, कलेक्टर ने 14 जून 2021 के बाद बने सभी निर्माणों को अवैध घोषित कर दिया है।
प्रशासन के द्वारा की गई जांच में पता चला कि मुआवजे के लिए बंधा में सिंगरौली के अलावा मध्य प्रदेश के कई जिलों के लोग मकान बना रहे हैं। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे प्रदेशों के लोग भी सिंगरौली में मुआवजा पाने के लिए सक्रिय रहे हैं। कथित तौर पर यूक्रेन के लोगों ने भी यहां घर बनाया है।
गौरतलब है कि कोल ब्लाक के लिए तेंदुहा, पिडरवाह, देवरी, पचौर और बंधा गांव की जमीनों का अधिग्रहण किया जाना है। इस अधिग्रहण में 10 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं। यहां रहने वालों को विस्थापित किया जाना है। इसके लिए मुआवजे का वितरण भी होना है।
कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला के मुताबिक 14 जून 2021 को अधिसूचना जारी हुई थी, जिसमें बिड़ला ग्रुप के मेसर्स ईएमआइएल माइनिंग एंड मिनरल्स रिसोर्सेस लिमिटेड बंधा कोल ब्लाक के लिए तेंदुहा, पिडरवाह, देवरी, बंधा और पचौर की भूमि का परिसीमन आदेश हुआ।
23 दिसंबर 2021 को सर्वे के बाद आदेश जारी किया गया। स्थानीय लोगों ने यहां बाहरी लोगों को दलालों के माध्यम से भूखंड बेच दिए। जिसके बाद प्रशासन ने गांव की जमीन के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी।
कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने आगे बताया कि जमीन अधिग्रहण के समय कई बार गांव का सर्वे किया गया। पता चला कि गांव के बाहर के लोगों के नाम पर भी मकान हैं, जो दूसरे जिलों और प्रदेश के रहने वाले हैं।
ड्रोन सर्वे कराया गया, जिससे ये वेरिफाई किया गया कि कितने मकान हैं जो पहले नहीं बने थे और मुआवजे के लिए बनाए गए। इसके अलावा गांव से चार हजार से अधिक आपत्तियां प्राप्त हुईं थीं। इसके निराकरण के लिए सर्वे कराया गया, जिसमें ये अवैध मकान चिह्नित किए गए।
भू-अर्जन अधिकारी रमेश तिवारी ने बताया कि जमीन का मुआवजा मिलेगा, लेकिन मकान के लिए मुआवजा नहीं मिलेगा।
जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड के अंकित कुमार पाल और उत्तर प्रदेश के देवरिया के 10 लोगों ने यहां घर बनाए हैं। मुंबई-ठाणे के उमाकांत त्रिपाठी और गुजरात वड़ोदरा के ललन तिवारी के नाम भी यहां घर हैं।
प्रशासन की लिस्ट में ऐसे हजारों नाम हैं, जो अन्य राज्यों से इस दूर-दराज के गांव में आकर मकान बना चुके थे। मुआवजे के लिए ये मकान आठ से 10 महीने में बनकर तैयार हो गए। ज्यादातर लोगों ने न तो छत बनाई, न खिड़की-दरवाजे लगाए।

