मानस भवन में हुई किताब मामले ने लिया सियासी रूप, भाजपा कार्यालय के घेराव की कोशिश नाकाम, संविधान की प्रति भेंट करने जा रहे थे कांग्रेसी

जबलपुर। शनिवार को मानस भवन में अनुसूचित जाति जनजाति और ओबीसी संगठन के कार्यक्रम में हिंदू देवी देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी वाली किताबों के मामले ने अब सियासी रूप ले लिया है।
इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।
इस मुद्दे को लेकर बुधवार को कांग्रेस ने प्रदर्शन किया और भारतीय जनता पार्टी कार्यालय का घेराव करने के लिए रानीताल में इकट्ठे हुए। लेकिन, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उन्हें रोक लिया गया।
कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भाजपा नेताओं को संविधान की प्रति भेंट करने जा रहे थे।
इसे लेकर कई घंटे तक रानीताल से लेकर भाजपा कार्यालय तक गहमागहमी का माहौल बना रहा।
वहीं, मौके पर वज्र और दंगा निरोधी वाहन सहित भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
काफी देर बाद जब कांग्रेस के कार्यकर्ता आगे बढ़े तो पुलिस ने बैरिकेड की जगह पर उन्हें रोक लिया और समझाइश देकर वापस भेज दिया।
इसे लेकर कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस तरह से मानस भवन में कार्यक्रम के दौरान हंगामा और मारपीट की गई, उससे संविधान का अपमान हुआ है।
इधर, भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर का कहना है कि वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं का इंतजार करते रहे, लेकिन उनके पास कोई नहीं आया। वे उन्हें आईना दिखाना चाहते थे।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस को खुद संविधान का सम्मान करना सीखना चाहिए। क्योंकि, कई बार उनके नेता संविधान का अपमान कर चुके हैं।

 

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