शिक्षा विभाग का पोर्टल बना मायाजाल, पोर्टलों में फंसा 67 हजार छात्रों का डेटा, 34 हजार बच्चे लापता

DR. SUMIT SENDRAM

ग्वालियर। सरकार एक ओर डिजिटल इंडिया और पेपरलेस वर्किंग का दावा कर रही है। वहीं, दूसरी और ग्वालियर जिले के शिक्षा विभाग में पोर्टलों का ऐसा ‘मायाजाल’ बुना गया है कि हजारों छात्रों का रिकार्ड ही गायब नजर आ रहा है।
यूडाइस पोर्टल एवं एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के बीच 67 हजार छात्रों का भारी अंतर मिला है।
हैरानी की बात यह है कि तकनीकी रूप से इन दोनों पोर्टलों पर बच्चों का नामांकन एक समान होना चाहिए, लेकिन मैदानी स्तर पर बरती गई लापरवाही ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अगर समय रहते इस डिजिटल विसंगति को दूर नहीं किया गया, तो न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक कभी नहीं पहुंच पाएगा।
इस 67 हजार के अंतर में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 34 हजार लापता बच्चों का है।
दरअसल, ये बच्चे लापता नहीं हैं, बल्कि तकनीकी रूप से एजुकेशन पोर्टल के ड्राप बॉक्स में पड़े हुए हैं।
नियमानुसार जब कोई छात्र एक स्कूल छोड़कर दूसरे में जाता है, तो नए स्कूल को उसे ड्राप बॉक्स से इंपोर्ट कर अपने पोर्टल पर दिखाना होता है। लेकिन ग्वालियर के स्कूलों ने इन 34 हजार बच्चों को सिस्टम में स्वीकार ही नहीं किया। नतीजा यह है कि ये छात्र पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं, जिससे इनका शैक्षणिक रिकार्ड अधर में लटका हुआ है।
पोर्टल की इस अव्यवस्था का सीधा असर गरीब और जरूरतमंद छात्रों की आर्थिक सहायता पर पड़ रहा है।
जिले के स्कूलों में 48 हजार छात्रों की छात्रवृत्ति प्रोफाइल अब तक अपडेट नहीं की गई है। प्रोफाइल अपडेट न होने और पोर्टल पर तकनीकी त्रुटियों के कारण इन छात्रों की छात्रवृत्ति लटक गई है।
शैक्षणिक सत्र बीतने को है, लेकिन संकुल और स्कूल स्तर पर प्राचार्यों की सुस्ती ने हजारों विद्यार्थियों को उनके हक की राशि से वंचित कर रखा है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक जनपद शिक्षा केंद्रों और स्कूलों में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटरों और जिम्मेदार अधिकारियों ने डेटा फीडिंग को गंभीरता से नहीं लिया।
यूडाइस पोर्टल पर जो जानकारी भरी गई, उसे एजुकेशन पोर्टल से मैच नहीं किया गया।
यह विसंगति जिला शिक्षा अधिकारी की हालिया समीक्षा बैठक में खुलकर सामने आई, जिसमें बीआरसी डबरा और बीआरसी शहर क्रमांक-2 की कार्यप्रणाली पर सबसे ज्यादा सवाल उठे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने कड़ा रुख अपनाया है।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ड्राप बॉक्स में लंबित सभी 34 हजार बच्चों को तत्काल संबंधित स्कूल पोर्टल पर इंपोर्ट करें। 67 हजार छात्रों के डेटा गैप को जीरो पर लाया जाए। छात्रवृत्ति प्रोफाइल को लॉक करने और स्वीकृत करने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर पूरी की जाए।
जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने बताया कि सभी बीईओ, बीआरसी सहित संकुल प्राचार्यों को पोर्टल पर के अंतर को जल्द से जल्द ठीक करने के निर्देश दिए हैं। जिससे यह अंतर दूर हो जाए। साथ ही जो बच्चे ड्राप बॉक्स में हैं, वे भी पोर्टल पर अपडेट हो जाएं।

 

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