मोरपंख मुकुट एवं बादाम माला से त्रिनेत्र स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ी भक्तो की भीड़

DR. SUMIT SENDRAM

उज्जैन। बुधवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुई।
मंदिर के कपाट खुलते ही सर्वप्रथम वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया और आज्ञा लेकर चांदी द्वार खोला गया। इसके बाद गर्भगृह के पट खोले गए।
पुजारियों ने भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारकर पंचामृत पूजन किया और कपूर आरती संपन्न कराई।
अभिषेक के बाद भगवान को भांग, चंदन, सिंदूर और आभूषणों से दिव्य स्वरूप में श्रृंगारित किया गया।
नंदी हाल में नंदी जी का स्नान, ध्यान एवं पूजन किया गया। जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शकर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान महाकाल का पूजन हुआ। इसके बाद ड्रायफ्रूट, फल और मिठाई का भोग लगाकर भस्म अर्पित की गई।
भक्तो को भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों से बनी माला धारण कर भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई।
मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।

 

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