जबलपुर। डुमना एयरपोर्ट में खराब मौसम और कमजोर दृश्यता के बावजूद विमानों की लैडिंग संभव होगी।
विमानतल की लंबाई भी बढ़ गई है, जिस वजह से बड़े विमानों की लैडिंग पहले से और अधिक सुरक्षित होगी।
अप्रैल माह से नए रनवे पर लैंड करने वाले विमान इंस्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) कार्य करने लगेगा। अभी यह सिस्टम लगा तो हैं, लेकिन इसका संचालन नहीं हो रहा है। इस वजह से ठंड में छाए कोहरे की वजह से पिछले दो दिन विमानों की आवाजाही बाधित हुई।
गौरतलब हैं कि डुमना एयरपोर्ट मध्यप्रदेश में इंदौर के बाद दूसरा सबसे लंबा रनवे है। रनवे की लंबाई 2750 मीटर हो गई है। इस टेबिल टॉप रनवे को नागर विमानन महानिदेशालय से मंजूरी मिल चुकी है। अब सिर्फ औचपारिक शुरुआत होनी है। जून के पहले सप्ताह में इसे विमानों की लैडिंग के लिए शुरू कर दिया जाएगा। बता दे कि नए रनवे पर इंस्ट्मेंट लैडिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे विमानों की लैडिंग पहले से ज्यादा सटीक और सुरक्षित तरीके से हो पाएगी।
बता दें कि मौसम खराब होने पर अभी विमानों की लैडिंग में परेशानी होती थी। एयर कंट्रोल टैफ्रिक की तरफ से लैडिंग की अनुमति नहीं मिलती है। बिना आईएलएस के 1500 से 1800 मीटर तक दृश्यता होने पर ही विमान की लैडिंग सुनिश्चित होती है, लेकिन इस सिस्टम के लगने के बाद 500 मीटर दृश्यता होने के बाद भी विमानों की लैडिंग संभव होगी। ठंड या बारिश के मौसम में यह बेहद उपयोगी साबित होगा। उन दिनों मौसम आए दिन खराब होने की वजह से विमानों को लैडिंग के लिए मौसम साफ होने का इंतजार करना पड़ता है कई बार तो विमानों को अन्य शहरों के एयरपोर्ट में लैडिंग करवानी पड़ती थी।
एयरपोर्ट के प्रभारी डायरेक्टर वीके सूरी ने बताया कि इंस्टूमेंट लैडिंग सिस्टम को लगाया जा चुका है, लेकिन इसका संचालन नहीं प्रारंभ हो पाया है। आईएलएस का कैलिब्रेशन हो चुका है सिर्फ डीजीसीए से निरीक्षण के पश्चात अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में दो-तीन माह का समय लग सकता है, इसलिए माना जा रहा है कि अप्रैल माह यह उपकरण प्रारंभ हो सकता है।

