इंदौर। नगर निगम में डेढ़ सौ करोड़ के फर्जी बिल घोटाले के आरोपी इंजीनियर अभय राठौर की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी।
कोर्ट में सुनवाई के बीच अभय राठौर ने कोर्ट के सामने निगम में चल रहे नौकरों के फर्जीवाड़े को भी उजागर कर दिया। निगम के पूर्व आला अधिकारियों के साथ महापौरों पर भी आरोपी ने सवाल उठा दिए। फर्जी बिल घोटाले में इंजीनियर अभय राठौर ने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने नगर निगम के पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा किया। अन्य लोगों को भी मामले में भागीदार बताया। इंजीनियर सुनील गुप्ता पर भी प्रकरण में शामिल होने का आरोप लगा दिया।
अभय राठौर के अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि नगर निगम में 300 कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा गया है।
ये आउटसोर्स कर्मचारी असल में नगर निगम में सेवा ही नहीं देते। इन्हें घरेलू नौकर के तौर पर राजनीतिक दलों के प्रभावशाली नेताओं, सेवानिवृत्त अधिकारियों, पूर्व पार्षदों, अधिकारियों के यहां लगाया गया है। इनकी उपस्थिति निगम में फर्जी तरीके से दिखाई जाती है और राशि का खर्चा नगर निगम द्वारा हर साल 12 करोड़ रुपये उठाया जाता है।
अभय राठौर की ओर से कहा गया कि यह परंपरा वर्षों से जारी है। और तो और इंजीनियर सुनील गुप्ता पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए तथा ड्रेनेज विभाग में हुए फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार बताया।
शासन की ओर से प्रकरण में पैरवी कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक श्याम दांगी ने पैरवी की। उन्होंने अभय राठौर की जमानत का विरोध किया।
कोर्ट में शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि अभय राठौर को जमानत नहीं मिलनी चाहिए, वह शातिर दिमाग का है और उसका काफी प्रभाव है, वह सबूत नष्ट कर देगा। शासन के वकील ने कहा कि राठौर की ठेकेदारों के साथ बातचीत के कई रिकार्ड मौजूद हैं।
फर्जी बिल घोटाले के आरोपी ठेकेदार जाकिर से आई फोन भी लिए हैं। अब तक सात एफआईआर हो चुकी है। वह भुगतान राशि में से सबसे बड़े हिस्से के रूप में 50 प्रतिशत हिस्सा रखता था। इस राशि से उसने अवैध संपत्ति बनाई। ठेकेदारों के साथ ही वह निगम के राजकुमार साल्वी, उदय भदौरिया व अन्य के साथ मिलकर फर्जी फाइल का पूरा खेल करता था।
विशेष न्यायाधीश देवेंद्र प्रसाद मिश्रा ने सभी तर्क सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी। साथ ही कहा कि फरियादी द्वारा लगाए गए आरोप जमानत का आधार नहीं हो सकते हैं और न ही मेडिकल कारण भी जमानत के लिए उपयुक्त है, लेकिन प्रशासन से उम्मीद है कि वह इस मामले में जांच विधि की सीमा में रहते हुए निष्पक्ष तौर पर करते हुए इस आर्थिक अपराध के वास्तविक अधिकारियों के खिलाफ सम्यक कार्रवाई करे।


