सिंगरौली। जिले में तंबाकू उत्पाद, गुटखा पाउच का अवैध कारोबार जोरों पर है। जिस पर किसी की नजर नहीं है। लाखों-करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी कर सीधे तौर पर यह धंधा किया जा रहा है, जिस पर इन्कम टैक्स और जीएसटी विभाग का अंकुश नहीं है।
शहर सहित जिलों के कस्बों में यह धंधा जोरों पर है। रात के अंधेरे में चिप्स और कुरकुरे की गाड़ियों में छिपाकर गुटखा पाउच भेजे जाते हैं। रात के समय ही उन गाड़ियों को रवाना किया जाता है। जिन पर लाखों रुपए का टैक्स बनता है। नियमानुसार तंबाकू उत्पादों पर 25 प्रतिशत सेस और 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इसे बचाने की फिराक में यह काम किया जाता है।
जीएसटी विभाग ने अभी तक तम्बाकू उत्पाद, गुटखा पाउच पर छापामार कार्रवाई नहीं की है।
जिले मे एक कारोबारी इस मुख्य सरगना माना जा रहा है। लेकिन कार्रवाई नहीं होने से सरहद बना हुआ है। इस पर आज तक कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। इसी कारण दो नंबर का यह कारोबार खूब फल-फूल रहा है। जिस पर अंकुश नहीं लग पा रहा।
हाल ही में जीएसटी विंग ने आगरा-मुंबई नेशनल हाइवे से नई दिल्ली से कर्नाटक जा रहे एक गुटखा पाउच के ट्रक, कंटेनर को पकड़ा था, जिस पर लाखों रुपए की पैनल्टी लगाई थी लेकिन जिले में यह कार्रवाई आज तक नहीं हो पाई है।
सूत्र बताते है कि जिले मे आने वाली गुटखा पाउच रात मे आता है, और अलसुबह गाड़ी खाली कराकर रवाना कर दिया जाता हैं। जिले के कस्बों में जाने वाला गुटखा पाउच देर रात शहर के रहवासी क्षेत्रों में लगी पिकअप, मिनी ट्रक सहित फोर व्हीलर गाड़ियो से रवाना होती है। इन्हें रात के समय रवाना किया जाता है। इसमें भी पूरा ध्यान रखा जाता है कि कहीं चैकिंग हो रही हो तो पहले ही रैकी कर ली जाती है। फिर वाहनों को रवाना किया जाता है। हालांकि मार्च क्लोजिंग और अन्य विशेष मौकों पर ही विभागीय टीमें कार्रवाई करती है लेकिन वे गुटखा पाउच के दुकानों पर आज तक कार्यवाही नहीं की है, अन्य दुकानों पर जीएसटी विभाग ने कार्यवाही की है। इन बड़े कारोबारियों तक न जीएसटी टीम पहुंच पाती है न ही इन्कमटैक्स डिपार्टमेंट। इसी कारण यह कारोबार खूब फल-फूल रहा है।
नियमानुसार सर्वाधिक टैक्स तंबाकू उत्पाद, गुटखा, जर्दा, सुपारी इत्यादि पर लगता है। 100 प्रतिशत तक टैक्स चोरी करके के दो नंबर में यह कारोबार किया जाता है। प्रदेश सरकार का सेस टैक्स 25 प्रतिशत और 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। यह जमा करने के बाद उसे पूर्ण रेट में बेचने का प्रावधान है लेकिन दो नंबर में ये कारोबारी गुटखा, तंबाकू उत्पाद मंगवाते हैं, जिसमें 100 प्रतिशत टैक्स चुरा लेते हैं। जिससे शासन को सीधे तौर पर नुकसान है और खुद मनमानी कमाई कर रहे हैं।
सालभर के टैक्स कलेक्शन में यह बात सामने आई है कि जितना खपत जिले में गुटखा पाउच का है, उसकी आधी टैक्स कलेक्शन भी विभाग के पास नहीं हो पाई है। जिले में एक कारोबारी के पास इसकी डीलरशिप है। जिले मे इस कारोबारी का खासकर इसके गढ़ बने हुए है, जहां से अन्य जगह भी सप्लाई होती है। जिले मे बड़े स्तर पर गुटखे का कारोबार है। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में गुटखे की खपत की जाती है लेकिन अभी तक टैक्स कलेक्शन आधा भी नहीं हो पाया है।
जिले में गुटखा पाउच का कारोबार करने वाले कारोबारी की सेटिंग इंदौर के साथ ही सीधी राजस्थान से है। जहां से टैक्स चोरी का मामला जिले में प्रवेश करता है। साथ ही ब्रांडेड गुटखा पाउच में नकली और फर्जी गुटखा भरकर इंदौर में लोकल में पैक किया जाता है। जिसकी रेट ओरिजिनल पाउच के बराबर होती है, लेकिन इन्हें लोकल में बिना किसी टैक्स दिए पूरी कीमत में ही दी जाती है। इस कारोबार को रफ्तार कोरोना काल में ज्यादा मिली है। जिसमें बे-रोक टोक दो नंबर में खूब बिक्री इनकी हुई। वर्तमान में भी इनमें अंकुश नहीं लग पाया है।


