शहर में एक दर्जन प्रायवेट कंपनियां एक किश्त न चुकाने पर धमकियां देने पर हो जाती हैं उतारू, पहले लोन का झांसा और फिर मुसीबतों में फांसना

सीधी। शहर में चल रहीं एक दर्जन प्रायवेट कंपनियां इन दिनों आम परिवारों लिए खासी मुसीबतों का सबब बनी हुई हैं।
ऐसा इसलिए क्योंकि पहले तो इनके कर्मचारियों द्वारा अनेक तरह के झांसे देते हुए लोगों को लोन लेने पर मजबूर कर दिया जाता है। इसके बाद यदि एक भी मासिक किश्त चुकाने में देर हो जाती है तो इसके बाद कई बार उनसे लिए चेक को बैंकों में लगाकर बाउंस करा दिया जाता है और फिर चौगुना चार्ज भी वसूला जाता है। इस दौरान पीडित कंपनी सहित विभिन्न विभागों के चक्कर काटते रहते हैं। लेकिन उन्हें कहीं से भी राहत नहीं मिलती है।
प्रायवेट फाइनेंस कंपनियों की शहर में बाढ़ सी आ गई है।
वे मोबाइल फोन से लेकर घर खरीदने तक के लिए आसान शर्तों पर ऋण मुहैया करवा रहीं हैं। शुरुआत में जन सामान्य उनके झांसे में आकर लोन ले लेता है और इसके बाद शुरु होता है समस्याओं का वह सिलसिला जो थमता ही नहीं है।
यहां चिंताजनक बात ये है कि इन प्रायवेट कंपनियों पर किसी भी विभाग का नियंत्रण नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब इनकी मनमानियों के बारे में बैंक, डाक विभाग, नगर पालिका एवं जिला प्रशासन के जिम्मेदारों से भी बात की जाती है तो कोई भी उन कंपनियों पर कार्रवाई करने से साफ इंकार कर देता है। इस दौरान उनका कहना होता है कि हर साल कई कंपनियां देश में बनतीं हैं और बाद में विभिन्न शहरों में उनके दफ्तर भी खुल जाते हैं। लेकिन न तो वे कभी किसी विभाग के समक्ष जानकारी प्रस्तुत करती है और न ही कोई विभाग उनकी जानकारी लेना जरूरी समझता है, और शायद इसीलिए कंपनियों की मनमानी हमेशा जारी रहती है।
पीड़ित परिवारों की मानें तो जैसे ही ये निजी कंपनियां किसी को ऋण मुहैया कराती है तो इसके बाद से ही संबंधित परिवारों की मुसीबतें शुरु हो जातीं हैं। मसलन लोन की किश्त जमा होने की अंतिम तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही नियमित तौर पर लोगों को फोन कर किश्त जमा करने का स्मरण दिलाया जाने लगता है। इसके अलावा यदि किसी महीने किश्त जमा नहीं हो पाती है तो ऋण मुहैया कराने के दौरान जिन खाली चेकों को वे अपने पास गिरवी रखवाती है तो उन्हें बैंकों में बार-बार प्रस्तुत कर चेक बाउंस का मामला बनाते हुए चौगुनी राशि भी वसूल करती है।
जानकारों की मानें तो शहर में अभी एक दर्जन से अधिक प्रायवेट कंपनियां चल रही हैं। इनके हेड ऑफिस तो दिल्ली, राजस्थान, पुणे और गुजरात में होते हैं लेकिन ब्रांच ऑफिस शहर के कॉलोनियो आदि इलाकों में स्थित हैं। इन तमाम ब्रांचों में नियमित कर्मचारियों के अलावा दर्जन भर ऐसे कर्मचारी भी होते है जो कि दिनभर यहां से वहां घूमकर आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों को विभिन्न प्रकार का लोन मुहैया कराने का कार्य करते हैं।
इन तमाम निजी कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा सर्वप्रथम उपभोक्ताओं को मोबाइल, टीवी, फ्रिज एवं वाशिंग मशीन आदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण क्रय करने उन्हें फायनेंस की सुविधा प्रदान की जाती है। इसके बाद जैसे ही यह छोटा ऋण चुकता होता है कि तभी दोपहिया अथवा नकदी राशि के अलावा मकान खरीदने के लिए भी बड़ा ऋण लेने का लालच दिया जाने लगता है। इसके लिए पहले तो वे छोटे ऋण चुकाने के एवज में बधाई देते हुए इसी तरह बड़ा लोन भी आसानी से चुकाने संबंधी प्रोत्साहन देते हुए अपना कमीशन लेकर लाखों का ऋण उन्हें दिलवा देते।

 

Next Post

कुसमी थाने से मानव तस्करी का मामला, काम के बहाने बाहर ले जाकर युवती को बेचा

सीधी। जिले के थाना क्षेत्र कुसमी अंतर्गत मानव तस्करी का मामला सामने आया है। जहां एक आदिवासी युवती को बहला फुसला कर काम दिलाने के बहाने बाहर ले जाया गया और वहां पर पैसे लेकर उसे बेच दिया गया। जहां खरीदार द्वारा जबरन उससे शादी कर उसके साथ बलात्कार किया […]