इंदौर से सूखा कचरा लेने वाली कंपनी ने नगर निगम को नहीं किया भुगतान, स्मार्ट सिटी बोर्ड ने अनुबंध किया निरस्त

इंदौर। इंदौर शहर से सूखा कचरा लेने वाली नेप्रा कंपनी का ठेका आगे नहीं बढ़ाया जायेगा।
स्मार्ट सिटी बोर्ड ने कंपनी का ठेका सात वर्ष के लिए आगे बढ़ाने वाले अनुबंध को निरस्त कर दिया है। कंपनी को वर्ष 2028 के बाद इंदौर से अपना काम समेटना होगा।
स्मार्ट सिटी कंपनी शहरभर से सूखा कचरा लेने का ठेका किसी अन्य कंपनी को देगी। नेप्रा से बकाया राशि वसूलने को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी।
बता दे कि स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कंपनी ने वेस्ट मैनेजमेंट एजेंसी नेप्रा को वर्ष 2018 में ठेका दिया था।
वर्ष 2018 से नेप्रा ने सूखा कचरा तो लिया, पर इसके एवज में एक रुपये का भी भुगतान निगम को नहीं किया। बावजूद पूर्व निगमायुक्त प्रतिभा पाल व स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने नेप्रा को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों को धता बताते हुए उसके साथ हुए मूल अनुबंध को पुरानी शर्तों के साथ सात वर्ष के लिए बढ़ा दिया था।
साथ ही कोरोना काल की 22 माह की अवधि को भी यह कहते हुए बढ़ाया था कि कोरोना काल में नेप्रा को शहर से पर्याप्त सूखा कचरा नहीं मिला।
मामला संज्ञान में आने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भी लिखा था।
हाल ही में स्मार्ट सिटी बोर्ड बैठक में नेप्रा को आगे बढ़ाए अनुबंध को निरस्त कर दिया गया। महापौर ने इसकी पुष्टि की है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि नेप्रा का अनुबंध गलत तरीके से आगे बढ़ाया गया था। उसे प्रतिवर्ष एक करोड़ 41 लाख रुपये का भुगतान निगम को करना था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। बावजूद इसके उसका अनुबंध बढ़ा दिया गया। गड़बड़ी सामने आने के बाद बढ़ा हुआ अनुबंध निरस्त कर दिया गया है। कई कंपनियां सूखा कचरा लेने को तैयार हैं और वे नेप्रा से कई ज्यादा राशि निगम को देने की बात कर रही हैं। हम नेप्रा से बकाया राजस्व वसूलने की भी कार्रवाई कर रहे हैं।
स्मार्ट सिटी सीईओ दिव्यांक सिंह ने बताया कि भुगतान के संबंध में नोटिस जारी होने के बाद नेप्रा ने निगम में 13 लाख रुपये जमा कराए हैं। निगम को वर्ष 2018 से अब तक आठ करोड़ रुपये से अधिक वसूलना हैं।
मामले में यह बात भी सामने आई थी कि स्मार्ट सिटी के तत्कालीन अधिकारियों ने नेप्रा की ओर से अनुबंध आगे बढ़ाने के आवेदन पर 24 घंटे के भीतर ही निर्णय ले लिया था। यह भी कि कंपनी ने ठेका लेने के बाद कोई राजस्व का भुगतान नहीं किया, बावजूद इसके ठेका आगे बढ़ा दिया गया था।

 

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