इंदौर। रोबोटिक सर्जरी कैसे होती है, रोबोट कैसे मानव से बेहतर सर्जरी कर सकते हैं, इस तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जाए और किन-किन रोगों में यह कारगर सिद्ध हो सकता है। इन तमाम सवालों के जवाब शहर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में दिए जा रहे हैं।
प्रदेश में यह पहला मौका है कि जब किसी सरकारी अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह मौका इंदौर के हिस्से में आया है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में रविवार से रोबोटिक सर्जरी का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। इसके तहत मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक और छात्र रोबोटिक सर्जरी की तकनीकें सीख रहे हैं। यहां वे सीख रहे रहे हैं कि रोबोटिक सर्जरी में एक छोटे से चीरे से बड़ी सर्जरी आसानी से हो सकती है।
इसकी वजह है कि जहां आमतौर पर कैमरा 360 डिग्री घूमता है। वहीं, रोबोट में लगा कैमरा 540 डिग्री घूमता है।
पहले दिन 50 से अधिक चिकित्सक इसका प्रशिक्षण लेने के लिए पहुंचे।
तीन दिनों तक होने वाली इस वर्कशॉप में करीब 200 चिकित्सक रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण लेंगे।
अस्पताल परिसर में एक वाहन में यूएसए की कंपनी के रोबोट आर्म को लाया गया, जो एक वाहन की तरह नजर आता है। इसी के अंदर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रोबोटिक सर्जरी कार्यक्रम के प्रभारी और विभागाध्यक्ष एवं गले के कैंसर के सर्जन डॉ. भावेश बंग ने बताया रोबोटिक सर्जरी का फायदा यह है कि एक छोटे चीरे से हम बड़ी सर्जरी कर सकते हैं। पहले दिन यहां पेट की सर्जरी को लाइव दिखाया गया है।
अधिकारियों का दावा है प्रदेश में पहली बार किसी सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों को रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. सुमित शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे डॉक्टरों और विद्यार्थियों को रोबोटिक सर्जरी की तकनीकों के बारे में जानकारी मिल रही है। यहां वो मशीन खुद से चलाकर देख पा रहे हैं। वर्तमान में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा केवल निजी अस्पतालों में उपलब्ध है। सुपर स्पेशिएलिटी में उपलब्ध होने पर यह सुविधा समाज के हर वर्ग को मिल सकेगी।


