सीधी। जेनेरिक दवाओं के प्रति जन जागरूकता के उद्देश्य से ऋषिकेश फ़ाउण्डेशन की बाल सेना मोगली पलटन द्वारा कछुआ चाल साइकल रैली आयोजित की गयी।
ऋषिकेश फ़ाउण्डेशन के प्रवक्ता सचिन पाण्डेय ने बताया कि जेनेरिक दवाओं के प्रति जन विश्वास पैदा करने के लिए मिशन रामबाण चलाया जा रहा है। इस मिशन के अंतर्गत साइकल रैली, पोस्टर मेकिंग, सेमिनार, वाद-विवाद, निबंध लेखन आदि कार्यक्रम लगातार छह माह से जारी हैं। इस तारतम्य में ये छठवीं साइकल रैली थी।
आम तौर पर सभी दवाएं एक तरह का ”केमिकल/ सॉल्ट’ होती हैं। जेनेरिक दवा जिस सॉल्ट से बनी होती है, उसी के नाम से जानी जाती है। जैसे- दर्द और बुखार में काम आने वाले पैरासिटामोल सॉल्ट को कोई कंपनी इसी नाम से बेचे तो उसे जेनेरिक दवा कहेंगे।
वहीं, जब इसे किसी ब्रांड जैसे- क्रोसिन के नाम से बेचा जाता है तो यह उस कंपनी की ब्रांडेड दवा कहलाती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि सर्दी-खांसी, बुखार और बदन दर्द जैसी रोजमर्रा की तकलीफों के लिए जेनरिक दवा महज 10 पैसे से लेकर डेढ़ रुपए प्रति टैबलेट तक में उपलब्ध है।
वही, ब्रांडेड में यही दवा डेढ़ रुपए से लेकर 35 रुपए तक पहुंच जाती है।
बाजार में जेनरिक दवाओं के प्रयोग को लेकर कई तरह के मिथक और टैबू मौजूद हैं। इनमें एक आम धारणा यह है कि जेनरिक दवाईयां असरदार नहीं होती हैं। ये दवाईयों असर करने में काफी समय लेती हैं, इनके निर्माण में घटिया मेटेरियल लगाया जाता है और ये सुरक्षित नहीं हैं।
हालांकि, ये सभी धारणाएं गलत और बेबुनियादी साबित हो चुकी हैं।
जेनरिक दवाईयां पूरी तरह से सुरक्षित, कारगर, सभी की पहुंच में और किफायती हैं।
सचिन पाण्डेय ने कहा है कि ऋषिकेश फ़ाउण्डेशन ब्रांडेड दवाओं में आम जन की गाढ़ी कमाई लुटने से बचाने को प्रतिबद्ध है।

