हैदराबाद से जबलपुर लाए गए 57 घोड़े का नया खुलासा, 19 घोड़े की हो चुकी मौत, 14 घोड़े गायब

DR. SUMIT SENDRAM

जबलपुर। हैदराबाद से जबलपुर लाए गए 57 घोड़ों को लेकर नया खुलासा हुआ है। इनमें से अब तक 19 घोड़ों की मौत हो चुकी है। ऐसे में 38 घोड़े रैपुरा के अस्तबल में होने चाहिए थे, लेकिन पशुपालन विभाग की गिनती में पता चला कि 14 घोड़े गायब हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रकरण भी विचाराधीन है।
बता दे कि मई 2025 में रैपुरा निवासी सचिन तिवारी ने ट्रकों के माध्यम से 57 घोड़ों को हैदराबाद से जबलपुर लाया और उन्हें पनागर के रैपुरा स्थित फॉर्म हाउस में रखा। धीरे-धीरे 19 घोड़ों की मौत हो गई।
वही, तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने इस मामले की जांच कराई थी, लेकिन सही जानकारी नहीं मिल पाई कि घोड़े क्यों और किस उद्देश्य से हैदराबाद से लाए गए थे।
पशु चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. प्रफुल्ल मून ने कहा कि वर्तमान में 14 घोड़े लापता हैं। डॉ. प्रफुल्ल मून के मुताबिक सचिन तिवारी ने 14 घोड़े किसी और अन्य स्थान पर रख दिए हैं, जिसको लेकर पत्राचार भी किया गया लेकिन सचिन तिवारी ने उसका जवाब नहीं दिया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में हॉर्स फार्म हाउस में 23 घोड़े उपलब्ध हैं, जिनकी सतत निगरानी भी की जा रही है, वर्तमान में सभी घोड़े स्वस्थ हैं।
मामले में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर का कहना है कि वेटरनरी की टीम को मौके पर भेज कर जांच करवाई जाएगी। इससे पहले घोड़े के मालिक सचिन तिवारी को भी नोटिस देकर जवाब मांगा गया था, लेकिन उन्होंने जानकारी नहीं दी है, आज एक बार फिर से वेटरनरी की टीम को मौके पर भेज कर सचिन तिवारी से पूछताछ की जाएगी कि आखिर घोड़े कहां गायब हुए हैं।
कलेक्टर कहना है कि अगर सचिन तिवारी ने जानबूझकर घोड़े गायब किए हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी।
जानकारी के मुताबिक एक घोड़ें में गैलेंडर नामक घातक बीमारी होने की पुष्टि हुई।
पशुपालन विभाग के अनुसार यह बीमारी घोड़ों के लिए जानलेवा होती है। विभाग की टीम लगातार बीमार घोड़ों का इलाज कर रही थी और उन्हें अलग रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद मौतें रुक नहीं पाई।
लाए गए घोड़ों में 18 थोर ब्रीड के थे, जिनमें 12 मेल और 6 फीमेल थे। वहीं, 39 मारवाड़ी नस्ल के घोड़े थे, जिनमें 4 मेल और 35 फीमेल शामिल थे। कुल मिलाकर 41 फीमेल और 16 मेल घोड़े थे। ये दोनों नस्लें उच्च गुणवत्ता की मानी जाती हैं और इनकी कीमत लाखों तक होती है। इन घोड़ों का अधिकतर उपयोग रेस में किया जाता है।
पेटा (पीईटीए) से जुड़ी पशु अधिकार कार्यकर्ता सिमरन ईशर ने आरोप लगाया है कि ये घोड़े हैदराबाद के हॉर्स पावर सुपर लीग (एचपीएसएल) चलाने वाले सुरेश पलादुगू और उसके सहयोगियों के हैं।
उन्होंने बताया कि हैदराबाद रेसकोर्स में इन घोड़ों से रेस करवाई जाती थी और उस पर फिलीपींस में ऑनलाइन सट्टा खिलाया जाता था।
फिलीपींस सरकार को जब सट्टे की जानकारी मिली, तो उन्होंने भारत सरकार को सतर्क किया। इसके बाद तेलंगाना सरकार ने उस रेस को बंद करवा दिया। गिरफ्तारी से बचने के लिए सुरेश पलादुगू ने 154 घोड़ों को देशभर में अलग-अलग स्थानों पर भेज दिया, जिनमें से 57 घोड़े जबलपुर लाए गए।

 

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