उज्जैन। सोमवार सुबह शहर के दशहरा मैदान पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारम्भ हुआ।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
आचार्यों के सान्निध्य में गीता पाठी ने एक साथ श्रीमद्भगवद गीता के 15वें अध्याय का पाठ कर आध्यात्मिक शक्ति का अनूठा वातावरण बना दिया।
महोत्सव का उद्देश्य गीता के शाश्वत ज्ञान को आधुनिक समाज, युवाओं और वैश्विक मानवता के विमर्श के केंद्र में स्थापित करना है, ताकि जीवन में कर्तव्य, अनुशासन और नैतिकता का संवर्धन हो सके।
शाम 7 बजे सांस्कृतिक प्रस्तुति में पुनीत इस्सर की नृत्य नाटिका ‘जय श्री कृष्णा-गीता सार’ मंचित की जाएगी।
इस महोत्सव के माध्यम से उज्जैन से गीता का सार्वभौमिक संदेश विश्व मंच तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है।
इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि गीता के पाठ हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं। भक्तियोग, कर्मयोग और ज्ञानयोग का सार गीता में है। गीता अद्भुत ग्रंथ है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सदैव हमें प्रेरणा देता हैं। उज्जैन का सांदीपनि आश्रम अद्भुत है, भगवान श्रीकृष्ण ने यहां आकर शिक्षा ग्रहण की।


