तीन मकान में लगी आग, एक किसान जिंदा जला, 6 फायर ब्रिगेड ने 3 घंटो में आग पर पाया काबू

DR. SUMIT SENDRAM

खंडवा। जिले के नर्मदानगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सक्तापुर गांव में मंगलवार सुबह तीन घरों में आग लग गई। घटना में एक किसान जिंदा जल गया। आग लगने के दौरान वह घर में अकेला था। 6 फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद तीन घंटे में आग पर काबू पाया।
घटना ग्राम सक्तापुर में सुबह करीब 7 बजे की है।
पुलिस के मुताबिक गांव में सभी सो रहे थे। आग और धुआं देखकर दो घरों के लोग जाग गए और जान बचाकर बाहर निकल आए। लेकिन तीसरे घर में 50 वर्षीय सूरज राठौर अकेले थे।
आग इतनी तेजी से फैली कि सूरज बाहर नहीं निकल पाए और उनकी जिंदा जलकर मौत हो गई।
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।
नर्मदानगर थाना प्रभारी विकास खिंची ने बताया कि सूचना मिलते ही तहसीलदार और पुलिस बल मौके पर पहुंच गया था। आग बुझाने के लिए मूंदी, पुनासा, ओंकारेश्वर और संत सिंगाजी थर्मल प्लांट से कुल 6 फायर ब्रिगेड बुलाई गईं। घरों में रखा गृहस्थी का पूरा सामान जलकर राख हो चुका था। मृतक सूरज किसान था, मां इंदौर में बेटी के पास गई थी।
सक्तापुर के सरपंच सुनिल राठौर ने बताया कि गांव के तेली राठौर समाज के 3 घरों में आग लगी है। सभी परिवार खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। सुबह 7 बजे परिवार के कुछ लोग बाड़े तरफ चले गए थे। वहीं, कुछ सो रहे थे। दो घरों में सोए हुए लोगों को तो उठा लिया था। लेकिन एक घर में सूरज का ध्यान नहीं रहा, वो आग की चपेट में आकर जल गया, जिससे उसकी मौत हो गई। सूरज घर में अकेला था। उसकी मां कुछ दिनों से बेटी के घर इंदौर गई हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि मूंदी और ओंकारेश्वर से पहुंची फायर ब्रिगेड में पानी खींचने के लिए पाइप नहीं था। एक बार वह खाली हुई तो लोग जलाशय से पानी भर नहीं पा रहे थे। अमूमन फायर ब्रिगेड के पिछले हिस्से में एक पाइप और मोटर पंप रहता है, जो कि खाली होने पर किसी जलस्त्रोत से तत्काल भरने के लिए होता है, लेकिन इन फायर ब्रिगेड में नहीं था। ऐसे में ग्राम पंचायत के टैंकरों से ग्रामीणों ने बाल्टियों से पानी निकाला और फायर ब्रिगेड में भरा है।
भाजपा नेता व समाजसेवी दिग्विजय सिंह तोमर (संटू) ने बताया कि सरपंच ने 7 बजकर 20 मिनट पर मुझे सूचना दी। फिर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को अवगत कराया। मैं मौके पर पहुंच गया। वहां देखा कि पुराने मिट्टी और लकड़ी के घर बने हुए थे। जो आग लगने के बाद ढह चुके थे। बिस्तर, अनाज से लेकर घर में रखा सारा सामान मलबे में दब गया है।
बता दे कि तीनों घर पूरी तरह जलकर मलबे में तब्दील हो गए हैं। अनाज, बिस्तर, कपड़ों से लेकर गहने तक या तो मलबे में दबे हैं या आग में जल गए हैं।
पड़ोसी बताते हैं कि आग तो सूरज के घर से ही उठी थी। सूरज का मकान दो मकानों के बीच था। एक तरफ दयाराम राठौर और दूसरी तरफ शंकर राठौर का मकान था। मकान पुराने और लकड़ी के बने हुए थे। सुबह के समय हवा भी तेज थी, जिसके चलते आग तेजी से फैली।
पीड़ितों का कहना है कि सुबह के 7 बजे थे, एक-एक करके सभी लोग उठ रहे थे। घर के कुछ लोग गाय-भैंस का दूध निकालने के लिए बाड़े की तरफ चले गए। चाय बनाने की तैयारी थी कि अचानक पड़ोस के घर से आग उठ गई। धुएं के साथ आग भभकने लगी तो सभी महिलाएं और बच्चे घर से बाहर की तरफ भागे। आग इतनी भयावह थी कि घर में रखे किसी सामान को बाहर तक नहीं निकाल पाए।

 

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