लोकायुक्त ने जिला पंचायत के लिपिक को रिश्वत लेते रंगे हाथ किया गिरफ्तार

DR. SUMIT SENDRAM

कटनी। जिला पंचायत में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। जहां दो साल पहले रिश्वत लेते पकड़े गए एक सचिव से हाईकोर्ट के आदेश पर बहाली के नाम पर बाबू ने रिश्वत मांगी। सचिव ने लोकायुक्त से शिकायत कर बाबू को ही ट्रैप करवा दिया।
जिला पंचायत के लिपिक को लोकायुक्त पुलिस जबलपुर ने पांच हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा है।
लोकायुक्त की कार्रवाई से जिला पंचायत में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार सह फरियादी सचिव आशीष दुबे वर्ष 2024 में रिश्वत लेने के एक मामले में ट्रैप हुए थे और उन्हें सह आरोपी बनाया गया था। इसके बाद जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें निलंबित कर दिया था। सचिव ने मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके आधार पर आठ माह पूर्व न्यायालय ने उन्हें बहाल करने के आदेश दिए थे।
बहाली की फाइल आगे बढ़ाने के लिए वह जिला पंचायत की स्थापना शाखा में पदस्थ लिपिक सत्येंद्र सिंह सोलंकी के पास पहुंचे। वहां उन्होंने फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 55,000 रुपये कीमत का मोबाइल मांगा। सचिव ने इतनी राशि एक साथ न देने की बात कही, जिस पर लिपिक ने किस्तों में राशि लेने की बात तय की थी।
लिपिक ने सचिव से पहली किस्त में पांच हजार रुपये, अगले माह दस हजार रुपये और बहाली के बाद शेष राशि देने की बात तय की थी। इसकी शिकायत सचिव आशीष दुबे ने लोकायुक्त जबलपुर एसपी से की थी।
लोकायुक्त एसपी ने मामले की जांच कर शिकायत सही पाए जाने पर गुरुवार को जिला पंचायत में टीम भेजी और जैसे ही आशीष ने किस्त के पांच हजार रुपये दिए, लिपिक को रंगे हाथ पकड़ लिया।

 

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