14 और 15 तारीख का झंझट हुआ खत्म, अब 56 साल तक 15 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति

जबलपुर। ग्रहों के राजा सूर्य 15 जनवरी को धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार अब 2080 तक आने वाले 56 वर्ष तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी।
इसके बाद फिर मकर संक्रांति एक दिन और आगे बढ़ जाएगी। यानी 56 वर्ष बाद सूर्य का मकर राशि में संक्रमण हर वर्ष 16 जनवरी को होगा।
इस बार सूर्य की राशि का परिवर्तन सुबह 9.13 बजे हो रहा है। इसी दिन खरमास समाप्त होगा और इसके बाद मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला ने बताया कि 2008 से 2017 तक सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी की संध्याकाल में होता रहा था। इसलिए 14 जनवरी को मकर संक्रांति मान्य थी। इसके बाद छह वर्ष तक सूर्य का राशि परिवर्तन अनिश्चित होने से संक्रांति कभी 14 तो कभी 15 जनवरी को मनाई गई। अब ऐसा नहीं होगा। सूर्य का राशि परिवर्तन 56 वर्षों (2080) तक सुबह ही होगा। उन्होंने बताया कि 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही थी। 1864 से 1936 तक 13 जनवरी और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को मनाई जाती रही।
ज्योतिषविदों के अनुसार, हर साल सूर्य के राशि परिवर्तन में 20 मिनट का विलंब होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का हो जाता है। 72 वर्ष में 24 घंटे का फर्क आ जाता है। सूर्य व चंद्रमा ग्रह मार्गीय होते हैं। यह पीछे नहीं चलते हैं। इसलिए एक दिन बढ़ जाता है। इस लिहाज से 2008 में ही 72 वर्ष पूरे हो गए थे।
इस वर्ष मकर संक्रांति सहित पांच प्रमुख पर्व सोमवार को पड़ रहे हैं। विद्वान और ज्योतिषाचार्य इसे शुभ संयोग मान रहे हैं। इस वर्ष 100 साल में 16वीं बार ऐसा संयोग बना है, जब नववर्ष का पहला दिन सोमवार था। यह संयोग भी शुभकारी माना जा रहा है।
विद्वानों के अनुसार सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है। इसलिए इस वर्ष भोलेनाथ का पूजन विशेष शुभ फलदायी होगा।

 

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