जेल में जज साहब ने सुनाए प्रवचन और भजन, कैदियों को दी सीख, क्रोध पर काबू पाना सीखो

सागर। क्षणिक आवेश में हुई हिंसा परिवार का नाश कर देती है, क्रोध पर काबू रखना सीखो। 84 लाख योनि के बाद यह मानव तन मिला है, अत: प्रभु का भजन कर लो। प्रभुश्री राम ने अपने जीवन में कितने कष्ट सहन किए लेकिन उन्होंने धर्म का रास्ता कभी नहीं छोड़ा।
यह प्रवचन सागर के प्रथम सत्र जिला न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह ने केंद्रीय जेल में दिए।
जिला जज केंद्रीय जेल में सागर ‘सर्व सुख की खान परमात्मा की प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन शरणागति विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। संगीत की धुन पर न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह ने कई भजन सुनाए।
जिला न्यायाधीश ने बाली, विभीषण, हनुमान, प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भीष्म पिता के जीवन प्रसंग सुनाते हुए उनसे सीख लेने की बात कही। उन्होंने कहा गलती मानव जीवन में होती हैं, लेकिन सजा के रूप में प्रायश्चित करना ही मानव धर्म है। उन्होंने कहा कि इन सजा भुगत रहे कैदियों में कुछ लोग निर्दोष सजा काट रहे होंगे, लेकिन पूर्व जन्म के कर्म भी मनुष्य योनि के साथी रहते हैं।
जरूरी नहीं तुमने पाप नहीं किया और सजा भुगत रहे हो, सकता है पूर्व जन्म में कुछ ऐसे अक्षम में अपराध हुए हो जिनकी सजा इस जन्म में मिली।
इस दौरान उन्होंने हनुमान चालीसा पर आधारित दोहा और श्लोक का पाठ कर उनके भावार्थ बताए।

 

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