लोकसभा चुनाव नतीजा आने के बाद मंत्रियों पर बढ़ेगा बेहतर प्रदर्शन का दबाव

भोपाल। लोकसभा चुनाव की मतगणना चार जून को हो जाएगी।
लगभग तीन माह आचार संहिता का दौर था। इसके पहले महज ढाई माह सरकार को काम करने का अवसर मिला। इसमें मंत्री अपना कोई खास प्रदर्शन नहीं दिखा पाए।
आचार संहिता हटने के बाद मंत्रियों पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव बढ़ जाएगा। इसकी वजह यह है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव हुए छह माह बीत जाएंगे।
सरकार को विधानसभा चुनाव के समय हुए घोषणाओं को अमल में लाना है और पार्टी की ओर से दी गई गारंटियों को अमलीजामा पहनाना है। इसकी झलक जुलाई में प्रस्तुत होने वाले मोहन सरकार के पहले पूर्ण बजट में भी दिखाई देगी। कैबिनेट में प्रहलाद सिंह पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह जैसे वरिष्ठ मंत्री हैं। ऐसे में इन पर दबाव रहेगा कि मोहन सरकार के प्रदर्शन को कैसे बेहतर बनाया जा सके।
मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के गठन के छह महीने 13 जून को पूरे होंगे। आचार संहिता लगने से पहले पहले चरण में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अलग-अलग विभाग और संभाग स्तरीय बैठक कर प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त करने का प्रयास किया है। अब जून-जुलाई में मोहन सरकार पहला बजट विधानसभा में पेश करेगी। चुनाव बाद बजट का प्रबंधन ही मप्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना बनेगा।
आने वाले दिनों में मोहन सरकार पर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में किए गए वादों को पूरा करने का दबाव रहेगा। इसलिए खजाने का बेहतर प्रबंधन भी मोहन कैबिनेट के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। भाजपा भी मप्र के सामने आने वाली इन्हीं चुनौतियों से वाकिफ थी।
यही वजह है कि पार्टी ने कैबिनेट का स्वरूप ऐसा तय किया, जिसमें सामूहिकता का भाव है, व्यक्ति केंद्रित कैबिनेट नहीं है। कैबिनेट को एक सामूहिक चेहरा बनाया गया है। इसके प्रमुख डॉ. मोहन यादव हैं, तो कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह और राव उदय प्रताप सिंह जैसे बड़े चेहरे कैबिनेट के चेहरे हैं।
ऐसे वरिष्ठ मंत्रियों पर बेहतर परफारमेंस का भारी दबाव है। ये सभी मंत्री भी अनुभवी हैं। कुछ सांसद रहने के कारण केंद्र सरकार में बेहतर पकड़ रखते हैं, तो कुछ राष्ट्रीय स्तर पर काम करने से। लोकसभा चुनाव के बाद अब किसी तरह की बाधा नहीं है इसलिए इन मंत्रियों के कंधों पर ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बेहतर संचालन की जिम्मेदारी भी है।

 

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