तीन पहिया वाहन चालकों का हर तरफ उत्पात, लोग त्रस्त, जिम्मेदार बने मूकदर्शक

सीधी। अंधाधुंध गति से दौड़ रहे ऑटो शहरवासियों के लिए आफत बन गए हैं।
ये बेलगाम ऑटो आए दिन लोगों को घायल कर रहे हैं और ट्रैफिक जाम का एक बड़ा कारण बन रहे हैं। हर चौराहे पर इनकी अराजकता के दृश्य आम हो गए हैं। चौराहो में इनकी धमाचौकड़ी से नागरिक त्रस्त हैं।
बीते दिनो शहर के अस्पताल चौराहे पर एक ऑटो चालक ने एक महिला को टक्कर मारकर घायल कर दिया। लोगों ने बताया कि क्षेत्र में ई-रिक्शा और ऑटो चालक खुलेआम यातायात के नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। सख्त कार्रवाई नहीं होने के कारण इनके हौसले बुलंद हैं। हर हाल में परेशानी आम नागरिकों के हिस्से में आ रही है।
इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस एवं आरटीओ के जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए हैं।
आम नागरिकों का कहना है कि इन पर ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्षेत्रीय नागरिकों ने बताया कि शहर के मुख्य मार्गों व चौक-चौराहों के आसपास बड़ी संख्या में स्कूल, कॉलेज, बाजार एवं हॉस्पिटल स्थित हैं, जहाँ पर रोजाना सुबह से लेकर शाम तक बड़ी संख्या में लोग आते-जाते रहते हैं। ऐसे ही लोगों को अपने ऑटो में ले जाने के लिए सुबह से ही ऑटो चालक चौराहो और आसपास के इलाकों में खड़े हो जाते हैं। जैसे ही कोई विद्यार्थी, महिला अथवा बुजुर्ग उन्हें दिखाई देता है, वैसे ही उन्हें अपने ऑटो में बैठाने के लिए दौड़ पड़ते हैं। इसी के चलते जब-तब लोगों को टक्कर मारने अथवा उनसे विवाद करने से भी ये पीछे नहीं हटते।
शहर के अस्पताल चौराहे से गांधी चौराहे मार्ग पर एक 26 वर्षीय महिला मोटर साइकिल मे सवार होकर अस्पताल चौराहे की तरफ आ रही थी, वही तेज रफ्तार उक्त आटो चालक ने तेजी से अपने ऑटो को आगे बढ़ा दिया। इससे महिला नीचे गिर पड़ी लेकिन उसे उठाने की बजाय चालक ने अपना ऑटो उसके पैर मे ठोकर मारकर आगे बढ़ा दिया। इससे महिला दर्द से कराह उठी और एक अन्य महिला उसे उठाने के लिए वहाँ पहुँची। इसके बाद पीड़िता ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी मौखिक तौर पर रास्ते से गुजर रहे पुलिस जवान को देकर ऑटो चालक को सीसीटीवी कैमरों की मदद से खोजने का आग्रह किया। इसके बाद पीड़ित महिला समीपवर्ती अस्पताल पहुँची, जहाँ उसे पैर में फ्रैक्चर होने की जानकारी देकर 1 माह का प्लास्टर बाँधा गया।
इस पूरे घटनाक्रम में उचित सहयोग नहीं मिलने से गरीब तबके से ताल्लुक रखने वाली महिला की निराशा और भी बढ़ गयी है।
लोगों का कहना है कि दबंगई पर उतारू तीन पहिया ऑटो एवं ई-रिक्शा चालक सड़क पर वाहन चलाते समय यातायात संबंधी किसी तरह के नियम नहीं मानते। मसलन न तो कभी ये खाकी वर्दी पहनकर वाहन चलाते हैं और न ही उनके पास लाइसेंस और रूट संबंधी दस्तावेज होते हैं। इसके अलावा ये अपने वाहनों को कहीं से भी बिना रोके निकाल लेते हैं और इसी कारण ये सड़क हादसों को अंजाम दे देते हैं।

 

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