जबलपुर। संस्कारधानी में भगवान के मंदिर भी चोरों की कुदृष्टि से नहीं बच पा रहे है। हैरानी की बात तो यह भी है कि चोरी की शिकायत लेकर जब स्थानीय लोग सहित मंदिर के पुजारी थाने जाते है तो उनकी शिकायत भी दर्ज नहीं की जाती है।
मामला शहर के तिलवारा थाने से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित भैरव-हनुमान मंदिर का है। जहां बीते पांच माह में सात चोरी की वारदात घटित हुई है।
वही, पुलिस ने एक भी चोरी का खुलासा नहीं किया है, लिहाजा क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी को लेकर अब स्थानीय लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करना भी शुरू कर दिया है।
बताया गया कि बीती रात एक बार फिर अज्ञात चोरों ने मंदिर में धावा बोलते हुए भगवान का मुकुट चोरी कर चंपत हो गए। हर बार की तरह इस बार भी स्थानीय लोग और पुजारी तिलवारा थाने पहुंचे तो पुलिस का कहना था कि चोरो की तलाश की जा रही है।
मंदिर के पुजारी राजेश तिवारी का कहना है कि सगड़ा स्थित भगवान हनुमान-भैरव मंदिर में पांच माह में ये सातवीं चोरी है, पर पुलिस के हाथ चोरों से आजतक खाली है।
वही, स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस तरह से चोरों ने घरों को छोड़कर अब मंदिर को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ये चिंता का विषय है क्योकि भक्त भगवान को बड़ी ही श्रद्धा से चढ़ावा चढ़ाते है और चोर उसे चोरी कर ले जाते है।
मंदिर के पुजारी का कहना है कि सात चोरी में कभी दानपेटी, कभी हार, कभी भगवान के बर्तन और अब तो वो चांदी का मुकुट भी सुरक्षित नहीं है जो कि भगवान की प्रतिमा से चिपका हुआ था।
उन्होंने बताया कि चोरी के बाद जैसे ही थाने जाते है तो पुलिस का कहना होता है कि तलाश कर रहे है, एफआईआर लिखने की मांग की जाती है तो मना कर दिया जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस अगर चोरी को लेकर जरा भी चौकन्नी होती और चोरों को पकड़ने का प्रयास करती तो आज ये चोरी नहीं होती।
स्थानीयों का कहना है कि जून 2024 में भी इसी मंदिर से अज्ञात चोरों ने दान पेटी को चोरी कर ले गए थे, सूचना तुरंत ही तिलवारा पुलिस को दी गई, जिस पर उनका कहना था कि आवेदन दो जांच करवा ली जाएगी।क्षेत्रीयो का कहना है कि पुलिस का यह रवैया सिर्फ अभी का नहीं बल्कि बीते पांच माह से चले आ रहा है, यही कारण है कि क्षेत्र में लगातार चोरियां हो रही है। स्थानीय लोगों ने पुलिस की गश्त पर भी सवाल खड़े किए है। उनका कहना है कि अगर पुलिस समय-समय पर रात को गश्त करे तो चोरों के इतने हौसले बुलंद नहीं होगें।


