दिव्यांगता का फर्जी प्रमाणपत्र लगा कर नौकरी करने वाले दो शिक्षकों की नियुक्ति जिला शिक्षा अधिकारी ने की रद्द

सिंगरौली। जिले में दिव्यांगता का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी कर रहे दो शिक्षकों की नियुक्ति रद्द कर दी गई है।
लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने दोनों शिक्षकों को जांच के बाद हटाया है। इसका आदेश शुक्रवार (23 अगस्त) को जारी किया गया है।
बताया गया कि दोनों शिक्षक ने छतरपुर से दिव्यांगता का फर्जी प्रमाण बनवाया था। नियुक्ति के बाद पहले जिला स्तर पर इनके दस्तावेजों की जांच हुई। इसके बाद दस्तावेज जांच के लिए भोपाल भेजे गए।
शिक्षक राजकुमार पटेल पिता भागचंद्र पटेल और दीपाली पिता उमाशंकर त्रिपाठी ने 30 मार्च 2023 को सिंगरौली जिले के दो अलग-अलग विद्यालयों में शिक्षक के पद पर नौकरी प्रारम्भ की थी।
राजकुमार पटेल ने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैढ़न में। वहीं दीपाली त्रिपाठी ने बिंदूल शासकीय विद्यालय में पढ़ाना शुरू किया था।
दोनों शिक्षकों ने छतरपुर जिला मेडिकल बोर्ड से दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाया था।
जांच करने पर पता चला कि छतरपुर में दोनों ही शिक्षकों का पंजीयन सूची में नाम दर्ज नहीं है। इसके बाद प्राथमिक रूप से इनका दिव्यांगता प्रमाण पत्र नकली पाया गया।
लेकिन दोनों ही शिक्षकों ने खुद को दिव्यांग ही बताया। जिसकी संभागीय मेडिकल बोर्ड से जांच कराई गई। जिसमें दोनों ही शिक्षक 40% से कम दिव्यांग पाए गए। इसके बाद कार्रवाई करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी एसबी सिंह ने दोनों ही शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दीं।
दरअसल में दिव्यांकता कोटा पर नौकरी के लिए कम से कम 40% या उससे ज्यादा दिव्यांग होना अनिवार्य है। लेकिन बर्खास्त किए गए दोनों शिक्षक 40% से भी काम दिव्यांग पाए गए थे।
जिला शिक्षा अधिकारी एसबी सिंह ने बताया कि दोनों शिक्षकों ने जो प्रमाण पत्र विभाग में प्रस्तुत किए थे। उनकी भोपाल स्तर पर जांच कराई गई। जिसमें दोनों ही शिक्षकों के जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इसी वजह से उनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं।

 

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