ग्वालियर। शहर में सबसे लंबे चले डिजिटल अरेस्ट का मामला सामने आया है, जिसमें साइबर ठगों ने 30 दिन तक बार्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के इंस्पेक्टर को निशाना बनाकर 70.29 लाख रुपये ठगी को अंजाम दिया।
बदमाशों ने इंस्पेक्टर को मनी लांड्रिंग केस में फंसे होने की धमकी देकर 25 बैंक खातों में 71 लाख 24 हजार 988 रुपए ट्रांसफर करा लिए। उन्हें विश्वास दिलाने के लिए इसमें से 94 हजार 998 रुपए लौटाए भी लेकिन 70 लाख 29 हजार 990 रुपए हड़प लिए।
बता दें कि इससे पहले जो वारदात सामने आई हैं, उनमें 24 घंटे से लेकर 72 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित 59 वर्षीय अबसार अहमद मूलत: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के मधुबन का निवासी हैं। उनकी टेकनपुर स्थित बीएसएफ अकादमी में पोस्टिंग है।
बीएसएफ के इंस्पेक्टर के मुताबिक 2 दिसंबर को वाट्सएप्प पर ऑडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि मुंबई साइबर ब्रांच से बोल रहा है। उसने कहा कि तुम्हारे खिलाफ मनीलांड्रिंग का केस है। इसमें मेरा अरेस्ट वारंट निकला हुआ है, फिर वह बोला कि मेरे मोबाइल नंबर पर कई केस चल रहे हैं। मेरे साथ मेरे परिवार को भी जेल भेज दिया जाएगा। कोर्ट से आदेश जारी हुआ है कि मुझे और मेरे परिवार को अरेस्ट किया जाए। फिर उनके द्वारा वाट्सएप्प के माध्यम से वीडियो कॉल किया गया। वे कई दिनों तक इसी तरह वीडियो कॉल पर संपर्क में रहकर धमकाने रहे। ठगों ने कहा कि मेरे पास जितना भी पैसा है, उसे एक खाते में ट्रांसफर करना होगा। अगर राशि सही पाई गई तो पैसा वापस आ जाएगा। अगर मनी लांड्रिंग में शामिल पाया गया तो पैसा जब्त होगी और जेल हो जाएगी। जैसा-जैसा वह कहते गए, मैं वैसा ही करता चला गया।
पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव ने बताया कि जल्द ही साइबर टीम केस से जुड़ी सभी जानकारियां जुटाने का काम करेगी। ठग कौन है, यह पैसा कितने ट्रांजेक्शन में किस तरह ट्रांसफर कराया और किन खातों में पैसे गए हैं। जल्द से जल्द उनका पैसा रिकवर करने का प्रयास करेंगे।

