आचार्यश्री विद्यासागर सभा भवन में धर्मसभा संपन्न, आचार्यश्री समयसागर ने दी दिव्य देशना

DR. SUMIT SENDRAM

जबलपुर। आचार्यश्री विद्यासागर सभा भवन में आयोजित धर्मसभा में आचार्यश्री समयसागर महाराज ने अपनी मंगल देशना में कहा कि गुरुदेव सदैव श्रावकों को संबोधित करते रहते थे, क्योंकि बार-बार धर्म और कर्म का बोध कराना आवश्यक होता है। विभिन्न प्रकार के कर्म निरंतर अपना प्रभाव डालते रहते हैं। कभी-कभी कर्म का प्रभाव प्रत्यक्ष नहीं होता, फिर भी हम भीतर से प्रभावित होते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा मन, वचन और काया जब राग-द्वेष के अधीन हो जाता है, तो उससे कर्म का क्षय होता है। मोहजन्य संस्कार हमें लगातार प्रभावित करते हैं, क्योंकि यह हमारे स्वभाव का हिस्सा बन गया है। यदि आपने एक दीपक जलाया है, तो उससे अनेक दीपक प्रज्वलित किए जा सकते हैं। मार्ग एक ही होता है, वह सन्मार्ग कहलाता है। यदि आपने सन्मार्ग को पकड़ लिया है, तो धर्म का पुनः-पुनः स्मरण करते रहो, आप निश्चित रूप से अपने मार्ग से च्युत नहीं हो पाएंगे। अनुप्रेक्षा के माध्यम से संवर भी होता है और निर्जरा भी।
धर्मसभा की शुरुआत में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के तैल चित्र के समक्ष सीए पूर्वी जैन द्वारा मंगलाचरण पाठ किया गया।
मुकेश जैन (विदिशा) ने दीप प्रज्वलन कर धर्मसभा का शुभारंभ किया।
जैन समाज मदर टेरेसा नगर की ओर से द्रव्य अर्पण किया गया।
पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्रतिभा मंडल की ब्रह्मचारिणी बहनों एवं सुनील जैन (इंदौर) को प्राप्त हुआ।
धर्मसभा का संचालन अमित पड़रिया ने किया।

 

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