भोपाल। श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर सियासत धीरे धीरे तेज होती जा रही है।
कांग्रेस ने अधूरे मंदिर के निर्माण में प्राण प्रतिष्ठा करने और भाजपा पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाकर आमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है। इस बयान को लेकर कांग्रेस चौतरफा घिर गई।
इस निर्णय पर आपत्ति लेते हुए धार जिला कांग्रेस के प्रवक्ता ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि पार्टी के निर्णय से मुझे आघात हुआ।
अब मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्रीय नेताओं के निर्णय का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण पूरा होने पर एक लाख से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ता श्रीराम भगवान के दर्शन करने अयोध्या जाएंगे।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्ट पर लिखा कि यज्ञ-अनुष्ठान में कौन से नियमों का पालन करना है ये तो सर्वोच्च पद पर आसीन धर्म गुरु ही बता सकते हैं और सनातन धर्म में शंकराचार्य से बड़ा कोई पद नहीं होता। एक नहीं चारों मान्य पीठों के शंकराचार्य शास्त्र सम्मत पूजा विधि की अवहेलना एवं अधूरे निर्मित मंदिर में भगवान के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा को अनुचित मान रहे हैं। इसीलिए उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने से इंकार कर दिया तो इसमें गलत क्या है?
अयोध्या का मतलब होता है, जो युद्ध से विमुख हो। परंतु पीएम मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने हिंदू वोट लेने की धुन में अयोध्या को राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्राण प्रतिष्ठा को भाजपा-आरएसएस द्वारा निजी इवेंट बनाए जाने की वजह से उसमें शामिल होने के लिए फिलहाल मना कर दिया है तो इसमें गलत क्या है?
बता दें आमंत्रण अस्वीकार करने पर भाजपा नेता लगातार कांग्रेस पर सवाल उठा रहे हैं।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस का सनातन और राम विरोधी चरित्र उजागर हुआ है। कांग्रेस हमेशा तुष्टीकरण की राजनीति करती आई है, यह एक बार फिर पूरे देश के सामने आ गया है।
सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि उनके मुंह पर मां सरस्वती ने विराजमान होकर मना कराया है। अब पूरा काम निर्विघ्न रूप से पूरे होंगे।

