इंदौर। जिस कलाकार को अपना काम बखूबी करना आता है, उसे फिर इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके साथी कलाकार कौन हैं, किस स्थान पर शूटिंग हो रही है, परिस्थिति क्या है आदि। उसे तो बस अपना काम अच्छी तरह करना है। मुझे भी जब नए कलाकारों के साथ उज्जैन में यह फिल्म करने का मौका मिला, तो परेशानी नहीं हुई। हां, इतना जरूर है कि आज के दौर में अपनी फिल्म के प्रचार का तरीका बदल गया है। पहले बड़े-बड़े होर्डिंग लगते थे, किंतु अब इंटरनेट मीडिया या लोगों के बीच में पहुंचना ही प्रचार का जरिया रह गया है। नेता तो सब जगह यहां तक कि होर्डिंग से लेकर किसी उत्पाद के विज्ञापन तक में नजर आ रहे हैं, मगर हम अभिनेताओं के लिए अब इंटरनेट मीडिया ही रह गया है।
यह बात बॉलीवुड अभिनेता ब्रजेंद्र काला ने मीडिया से हुई चर्चा में कही।
उज्जैन में फिल्माई गई फिल्म गुड लक के प्रमोशन के लिए ब्रजेंद्र फिल्म की मुख्य नायिका मालती माथुर, लेखक व निर्देशक प्रखर श्रीवास्तव तथा निर्माता व अभिनेता डॉ. आजाद जैन के साथ इंदौर आए थे। चर्चा के दौरान ब्रजेंद्र ने कहा कि पहले और अब में फिल्मों में बहुत बदलाव आ गया है।
पहले ख्यात अभिनेता जिस तरह फिल्मी अंदाज में संवाद बोलते थे, उसे खूब तवज्जो दी जाती थी, किंतु अब यदि वैसी ही संवाद अदायगी हो तो दर्शक पसंद नहीं करेंगे। अब संवाद इस तरह बोले जाते हैं जो स्वाभाविक लगें।


