जबलपुर। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने मां नर्मदा तट लम्हेटाघाट पर 5100 तरु रोपण यज्ञ में जनमानस को संबोधित करते हुए कहा कि आज पौधों का सबसे ज्यादा महत्व है, यदि हम एक पौधा लगाते हैं तो वह जीवन भर हमें करोड़ों रुपए की ऑक्सीजन, दवाइयां एवं हरियाली ही नहीं देता बल्कि जीवन जीने के लिए सुख और शांति भी देता है। यदि पेड़ नहीं होते हैं तो शहर पूरा एक गैस का गुब्बारा बन जाता है, जैसा कि राजधानी दिल्ली में की स्थिति हम सबके सामने हैं, जहां पर नेत्र रोग, हृदय रोग एवं चर्म रोगों के मरीजों की संख्या सर्वाधिक है। पहले नदियां बहुत गहरी हुआ करती थी, आज पौधे नहीं होने से पहाड़ जगह-जगह गिर रहे हैं, धड़क रहे हैं, जिसका असर निश्चित रूप से हमारे तापमान पर पड़ रहा है। आज हम प्रकृति को नष्ट कर कर शहर बसा रहे हैं, पौधे काटकर मंजिलें बना रहे हैं। नदियों और तालाबों को नष्ट करते करते जा रहे हैं, जिसका नतीजा बहुत भयानक होने वाला है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष 0.05% तापमान बढ जाने से प्राणी मात्र हलाकान हुआ। सैकड़ो व्यक्तियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। यदि यही तापमान 2 डिग्री तक बढ़ जाए तो प्राणी मात्र का जीवन जोखिम में पड़ जाएगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधा धरती को अपनी मां समझकर लगाना चाहिए। सभी अधिक से अधिक पौधे लगाकर आसन्न संकट से बचने अपनी महती भूमिका अवश्य निभाएं।
इस अवसर पर गायत्री परिवार द्वारा एक लाख पौधे लगाने का ही नहीं, उन्हें सुरक्षित और संरक्षित रखने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि बम्होस एयरोस्पेस डीआरडीओ के
पूर्व निदेशक सुधीर मिश्रा,
बरगी के विधायक नीरज सिंह, नगर परिषद भेड़ाघाट के अध्यक्ष चतुर सिंह लोधी, पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त डॉ. एमसी डाबर आदि के द्वारा पर्यावरण को बचाने का अनुरोध सभी से किया गया।
गायत्री शक्तिपीठ जबलपुर के ट्रस्टी बीबी शर्मा द्वारा कार्यक्रम में पधारे अतिथिगण, कार्यकर्ता भाई-बहनो का इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया गया।
कविता तिवारी, गीता डोंगरे द्वारा इस अभूतपूर्व पौधारोपण कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए सभी महिलाओं के सहयोग के लिए उनका धन्यवाद किया।


