भोपाल। राजधानी भोपाल में साइबर अपराधियों ने घुसपैठ बना ली है। हाल ही में देश के अन्य राज्यों में साइबर ठगी के मामलों में जांच में पता चला कि ठगी की रकम राजधानी में रह रहे कुछ लोगाें के खातों में ट्रांसफर हुई है। ठगी के लिए चर्चित राज्यों की तरह भोपाल के रहवासियों के भी बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी में होने लगा है।
साइबर पुलिस का कहना है कि पिछले दिनों बिहार के गिरोह के गिरफ्त में आने के बाद बैंक से जानकारी जुटाई जा रही थी कि खातों को किराये पर देने के बाद उनको कितना कमीशन दिया जा रहा था।
जांच में सामने आया है खाते में आई ठगी की राशि का करीब 10-15 प्रतिशत तक इन खाताधारकों को दिया जाता था। प्रदेश के श्योपुर, शिवपुरी, टीकमगढ़ एवं भोपाल के ऐसे करीब 400 बैंक को खंगाला जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि ठगों ने अलग अलग प्रदेश और उसके बाहर किराये के बैंक खातों का ऐसा नेटवर्क तैयार किया है उन तक पहुंच पाने की सभावना बहुत कम हो जाती है।
ठग चंद मिनट के अंदर 100 से 150 बैंक खातों में रकम को घुमा दे रहे हैं। पुलिस जब तक एक खाते को फ्रीज कराती है रकम दूसरे, फिर तीसरे खाते में पहुंच जाती है।
साइबर एक्सपर्ट संदीप शर्मा ने बताया कि लोन एप्प जैसे साइबर ठग रहते तो विदेश में हैं, लेकिन भारत में इनका पूरा सिंडिकेट काम करता है। अब यह प्रदेश के लोगों के बैंक खाता भी किराये पर लेने लगे हैं। इसके बदले साइबर ठग खाताधारकों को मोटी रकम देते हैं, ऐसे में बेरोजगार लोगों को लगता है कि इससे घर बैठे ही मोटी कमाई हो जाती है। इसलिए इनके निशाने पर कम आय वाले लोग रहते हैं, छात्र और महिलाओं के बैंक खातों का यह उपयोग करते हैं। जब ऑनलाइन ठगी में अधिकांश मामलों में पुलिस इन खाताधारकों को गिरफ्तार करती, तब तक मुख्य आरोपी बाहर निकल जाते हैं।
साइबर क्राइम के डीसीपी अखिल पटेल ने बताया कि भोपाल के लोगों के साथ के कुछ जिलों के लोगों के बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी में उपयोग हुए हैं, बिहार का गिरोह भी पकड़ा जा चुका है। जो फर्जी खाते उपलब्ध करवा रहा था। इस पर हनुमानगंज के साथ साइबर क्राइम पुलिस भी जांच में लगी है। आने वाले समय कई आरोपी पकड़े जाएंगे।

