भोपाल। लोकायुक्त पुलिस को मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के आवास और कार्यालय में 45 से अधिक रजिस्ट्रियां मिली हैं। इनमें कुछ उसके परिजनो के नाम की हैं। वह भी सौरभ के नौकरी में आने के पहले की हैं। बाकी रजिस्ट्री के संबंध में पुलिस संबंधितों से पूछताछ करेगी कि उस जमीन को खरीदने के लिए पैसा किसने दिया था और उपभोग कौन कर रहा था। इसी से तय होगा कि संपत्तियां बेनामी तो नहीं है।
इसके अतिरिक्त 15 बैंकों में व्यक्तिगत और कंपनियों के नाम से खाते भी मिले हैं। संबंधित बैंकों को पत्र लिखकर खातों से लेनदेन रोकने के लिए कहा गया है।
गौरतलब है कि लोकायुक्त पुलिस ने 18 दिसंबर को सौरभ शर्मा और उसके करीब चेतन गौर के आवास पर छापेमारी की कार्यवाही को अंजाम दिया था। इस छापेमारी कार्यवाही में बड़ी संख्या में संदेहास्पद दस्तावेज जब्त किए गए थे।
लोकायुक्त पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि रजिस्ट्री के अतिरिक्त जमीनों के अनुबंध पत्र भी हाथ लगे हैं। इनमें अंकित राशि को भी सौरभ शर्मा की संपत्ति में जोड़ा जाएगा।
वही, पुलिस ने ऐसे लोगों की सूची तैयार की है, जिनके नाम संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। इनसे पूछताछ की जाएगी। इसमें यह पता किया जाएगा जब संपत्ति अर्जित की गई उस दौरान उस व्यक्ति की स्थिति संपत्ति खरीदने की थी या नहीं है। यदि नहीं तो इस संपत्ति को बेनामी समझा जाएगा। यह माना जाएगा कि सौरभ के यहां मिली हैं, इसलिए उसी की है।
पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक सौरभ शर्मा की पत्नी दिव्या शर्मा की कुछ संपत्तियां दिव्या तिवारी और सलिल तिवारी के नाम पर हैं। पुलिस को आशंका है हर जगह सौरभ के नाम से संपत्ति होने पर पकड़े जाने का संदेह था, इसलिए पति का नाम न लिखकर पिता का नाम लिखा गया होगा।

