ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) से संबद्धता प्राप्त महाविद्यालयो की मुश्किलें अब बढ़ गई हैं। झुंडपुरा महाविद्यालय के मामले में जेयू में लागू हुई धारा 52 और कुलगुरु को बर्खास्त किए जाने का प्रभाव हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में चल रही जनहित याचिका में देखने को मिला।
शुक्रवार को हाई कोर्ट में हुई महाविद्यालयो में अनियमितता को लेकर याचिका की सुनवाई में हाई कोर्ट ने ईओडब्ल्यू को जेयू से संबद्धता प्राप्त सभी महाविद्यालयो की अनियमितताओं के संबंध में जांच करने और आरोपियो के खिलाफ न्यायालय में यथाशीघ्र आरोप पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई में जीवाजी विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि झुंडपुरा महाविद्यालय के संबंध में ईओडब्ल्यू द्वारा एफआइआर दर्ज कर ली गई है और शासन द्वारा आरोपी कुलगुरु को हटाकर नए कुलगुरु की नियुक्ति भी कर दी गई है।
इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने हाई कोर्ट को बताया कि ईओडब्ल्यू केवल झुंडपुरा के शिवशक्ति महाविद्यालय के मामले की जांच कर रहा है, जबकि झुंडपुरा के जैसे ही जेयू से संबद्धता प्राप्त 200 महाविद्यालय हैं जो जमकर फर्जी डिग्रियां बांट रहे हैं।
इस मामले को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए आदेश पारित किया कि झुंडपुरा की तरह ही जीवाजी विश्वविद्यालय से संबंधित सभी महाविद्यालयो की अनियमितताओं, औपचारिकताओं और अन्य अपराधों के संबंध में ईओडब्ल्यू जांच कर, दोषियों के विरुद्ध शीघ्र से शीघ्र सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत करें। इसमें जेयू भी पूरी सहायता प्रदान करे।

