शिक्षा अधिकारी को झूठ बोलना पड़ा भारी, कलेक्टर ने एक मिनट में खोली पोल, अब कटेगा वेतन

DR. SUMIT SENDRAM

बालाघाट। कलेक्टर मृणाल मीणा ने शुक्रवार को जब जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) कार्यालय का औचक निरीक्षण किया, तो अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली की पोल खुल गई। सबसे पहले डीपीसी जीपी बर्मन ही कार्यालय में मौजूद नहीं थे, जबकि उनका कंप्यूटर लॉग-इन हालत में टेबल पर खुला था। जिसके बाद कलेक्टर ने तुरंत डीपीसी को कॉल किया और उनकी लोकेशन पूछी। जवाब मिला ‘सर, मैं ऑफिस में हूं।’ लेकिन कलेक्टर स्वयं उस वक्त कार्यालय में ही मौजूद थे। ये झूठ उसी क्षण उजागर हो गया। जब कलेक्टर निरीक्षण पूरा कर बाहर निकलने लगे, तब डीपीसी जीपी बर्मन वहां पहुंचे।
केवल डीपीसी ही नहीं, उनके अधीनस्थ भी गैरहाजिर मिले।
सहा. परियोजना समन्वयक विवेक गुप्ता, योगेश बिसेन, थानथराटे, दिनेश गौतम, आकाश वल्के, भाकचंद पारधी और दीपक सौरकुड़े अनुपस्थित पाए गए। किसी के पास उनकी अनुपस्थिति का संतोषजनक जवाब नहीं था।
कलेक्टर ने तत्काल सभी अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। पाठ्यपुस्तकों की भारी संख्या में बंडल कार्यालय में पड़े मिले, जबकि एक दिन पहले ही समीक्षा बैठक में डीपीसी ने बताया था कि स्कूलों में 100% वितरण हो चुका है। यह झूठी और भ्रामक जानकारी सीधे कलेक्टर को दी गई थी। इससे स्पष्ट है कि वितरण की स्थिति पोर्टल पर अपडेट न करना एक बहाना था। कार्यालय में साफ-सफाई का भी अभाव पाया गया। फाइलें अस्त-व्यस्त थीं और स्टाफ की कार्यशैली बेहद अनियमित नजर आई।

 

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