नये साल पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचेंगे एक लाख से अधिक श्रद्धालु, वीआईपी प्रोटोकॉल बंद

DR. SUMIT SENDRAM

खंडवा। ओंकारेश्वर नर्मदा पावन क्षेत्र में नर्मदा नदी का प्रत्येक पत्थर-कंकड़ भगवान शिव का ही वास माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अटूट विश्वास है कि ओंकारेश्वर नर्मदा में जल के स्पर्श मात्र से पुण्य प्राप्ति होती है। यहां का कण-कण शिवम हैं। यही कारण है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा स्थान पाने वाले ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को केवल एक पल ही निहारने के लिए देश-विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालु बेताब रहते हैं। अंग्रेजी नव वर्ष का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। भक्तों का मानना है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से कष्ट और सभी संकट नष्ट होते हैं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
डिप्टी कलेक्टर एवं ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने विशेष चर्चा में बताया कि नये साल के पहले दिन करीब एक लाख श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर आने की संभावना है। इस दिन सामान्य द्वार से ही दर्शन कर सकेंगे। प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा बंद रहेगी।
दर्शन के साथ ही आम नागरिकों को दर्शन होंगे। सीढ़ियों की बजाय भक्त ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के रैंप से गुजरकर दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने बताया कि कतार में लगने वाले भक्तों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन में दो से ढाई घंटे का समय लगेगा। एक समय में चार लोग ही ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पाते हैं। काशिव के अनुसार बड़ी संख्या में भक्तों के आगमन को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। दिसंबर अंतिम पखवाड़े से ही भक्तों की भारी भीड़ प्रत्येक दिन आ रही है।
प्रशासन का लक्ष्य की देश-विदेश से आने वाले भक्तों को दर्शन और स्नान में किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। मंदिर ट्रस्ट के सभी कर्मचारी समय-समय पर अपनी सेवाएं देने में लगे हैं।
ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने कहा कि वर्तमान में प्रतिदिन 50 हजार से लेकर 60 श्रद्धालु ओंकारेश्वर ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के दर्शन करने पहुंचे रहे हैं। नये वर्ष 2026 में यह आंकड़ा लाखों को पार कर जाएगा। स्थान की कमी के कारण मंदिर दर्शन करने में समय लगता है, क्योंकि यहां की भौगोलिक स्थिति अन्य तीर्थ स्थान की तरह नहीं है। ओंकार पर्वत पर पहाड़ी पर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव का मंदिर सदियों पुराना बना है। इसलिए प्रशासन भी मंदिर में ज्यादा कुछ बदलाव नहीं कर सकता है। कोरोना कल के बाद से लगातार श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचने की संख्या बहुत ही बड़ी है।

 

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