भोपाल। प्रदेश की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को सरकार सशक्त बनाएगी।
इसके लिए भारत सरकार की मंशा के अनुसार सरकार अधिनियम में संशोधन कर चुकी है।
अब नए क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार किया जा रहा है। किसानों को दुग्ध उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए गुजरात की सहकारी संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य योजना बनाई जाएगी तो कर्मचारियों के भुगतान आदि व्यवस्था के लिए अंशदान बढ़ाया जाएगा।
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2021 में सहकारी अधिनियम में संशोधन करके यह प्रविधान कर दिया है कि अंशपूंजी आवश्यकता अनुसार बढ़ाई जा सकती है। इसके पहले यह अधिकतम 25 प्रतिशत थी। यह व्यवस्था इसलिए की गई थी क्योंकि भारत सरकार ने सहकारी समितियों में सरकारी हस्तक्षेप को न्यूनतम करने के लिए कहा था लेकिन समितियों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे सरकारी सहयोग के बिना कर्मचारियों को वेतन भी दे पाएं।
दरअसल, वेतन देने की जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होती है। खाद्यान्न के उपार्जन, उचित मूल्य की दुकानों के संचालन, खाद-बीज के वितरण और बिना ब्याज के ऋण देने में जो कमीशन मिलता है, उससे वेतन-भत्तों के साथ संस्था के अन्य खर्च निकाले जाते हैं। कांग्रेस सरकार के समय हुई कर्जमाफी के कारण भी समितियां डिफाल्टर हो गईं और वेतन बांटना तक मुश्किल हो गया।

