इंदौर। मात्र 600 स्क्वायर फीट में बने इमारत में चल रहे स्कूल के लगभग दो दर्जन से अधिक विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा से वंचित होना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक शहर के हीरा नगर के पास एमआर 10 स्क्वायर पर स्थित जय गुरुकुल एकेडमी स्कूल की ईमारत महज 600 स्क्वायर फीट में निर्माण किया गया है।
शिक्षा विभाग ने स्कूल को आठवीं तक की मान्यता दे दी थी। स्कूल के पास खेल मैदान तक नहीं है। बावजूद इसके शिक्षा विभाग ने स्कूल को आठवीं तक की मान्यता दे दी।
स्कूल संचालक ने बिना मान्यता के ही नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को नियमित प्रवेश देकर पढ़ाया। फीस वसूलने के बाद भी विद्यार्थियों का परीक्षा फार्म नहीं भरा। शिकायत के बाद स्कूल प्राचार्य और संचालक पुलिस की गिरफ्त में हैं।
स्कूल के फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब स्कूल संचालन ने 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को परीक्षा का रोल नंबर जारी नहीं किया। फीस भरने के बाद महीनेभर से विद्यार्थी रोल नंबर जारी करने की मांग कर रहे थे, लेकिन स्कूल संचालक द्वारा भ्रमित किया जा रहा था।
पालको ने बताया कि स्कूल संचालक द्वारा 10वीं के विद्यार्थियों से 10 हजार और 12वीं के विद्यार्थियों से 12 हजार रुपये बतौर परीक्षा शुल्क वसूल किया गया था, लेकिन परीक्षा फार्म तक जमा नहीं किए गए। हमारे बच्चों का एक साल बर्बाद हो गया है। हमें तो यह भी नहीं पता था कि स्कूल की मान्यता आठवीं तक ही है। सभी बच्चे परीक्षा देने जा रहे हैं, हमारे बच्चे उदास बैठे है।
जय गुरुकुल एकेडमी स्कूल के पास आठवीं तक की मान्यता है, जबकि स्कूल भवन के लिए कम से कम 1500 वर्गफीट जमीन की जरूरत होती है।
जिला परियोजना समन्वयक शांता स्वामी भार्गव ने बताया कि स्कूल की मान्यता की जांच की जा रही है। नियम विरुद्ध मिलने पर माान्यता निरस्त कर दी जाएगी।
स्कूल के 24 विद्यार्थी 10वीं और 12वीं की परीक्षा से वंचित रह गए हैं।
विद्यार्थियों ने बताया कि हम प्रदेश सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि हमें कैसे भी करके परीक्षा में शामिल कर ले, नहीं तो पूरा साल खराब हो जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक जय गुरुकुल एकेडमी द्वारा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के फार्म बाणगंगा स्थित राय एकेडमी से भरे जाते थे। जय गुरुकुल एकेडमी के विद्यार्थी राय एकेडमी के विद्यार्थी के रूप में परीक्षा देते थे, लेकिन इस बार फार्म राय एकेडमी पहुंचे ही नहीं।


