गुना। अग्नि बस हादसे में मृत ग्यारह यात्रियों की शिनाख्त डीएनए टेस्ट से हुई। जिसके बाद परिजनों को डेड बॉडी सौप दी गईं।
इस दौरान परिजन सफेद गठरी में बंधी डेड बॉडी को ले रहे थे, तो उनकी आंखें नम हो रही थीं।
खास बात यह कि कुछ मृतको के परिजन सीधे डेड बॉडी को इलाहाबाद ले गए, तो कुछ ने घर पहुंचकर अंतिम संस्कार की परंपरा पूरी की।
गौरतलब हैं कि 27 दिसंबर की रात डंपर की टक्कर से बस पलट गई थी और धू-धू कर आग के हवाले हो गई थी। इस हादसे में तेरह सवारियां जिंदा जल गई थीं, जिनमें से ग्यारह की शिनाख्त नहीं हो पाई थी। ऐसे में मृतकों के माता-पिता और भाइयों के ब्लड सैंपल लेकर फोरेंसिक लैब ग्वालियर भेजे गए। जिसकी रिपोर्ट पुलिस को मिल गई थी, जिसकी सूचना भी परिजनों को दी गई।
इसके बाद देर शाम परिजन जिला अस्पताल डेड बॉडी लेने पहुंच भी गए थे, लेकिन पुलिस ने रात में अंतिम संस्कार न होने और बिना फ्रीजर डेड बॉडी खराब होने के चलते सुबह बॉडी लेने बुलाया।
हालांकि, इस दौरान कुछ परिजनों ने बुलाने के बाद डेड बॉडी न देने पर नाराजगी भी जताई, लेकिन उसके बाद वें लौट गए थे।
इधर, जिला अस्पताल में जब ग्यारह मृतकों के परिजन पहुंचे, तो परिसर में गम का माहौल बन गया था। क्योंकि, मृत ‘अपनों’ के परिजन जहां हादसे के पांच दिन बाद भी बॉडी मिलने के इंतजार में पहले से गमजदा और परेशान थे, वहीं अस्पताल परिसर में मौजूद लोग भी एक साथ ग्यारह शवों के अंगों की सफेद गठरी को देखकर गमजदा नजर आए।

