इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय अपने विभागों से संचालित स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की फीस बढ़ा सकता है। कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्ष से फीस में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई है। अब विभाग इस दिशा में विचार करने लगा है।
फीस समिति ने विभागों से अप्रैल तक प्रस्ताव मांगे हैं।
विवि के अधिकारियों की मानें तो समिति आठ से 10 फीसद राशि ट्यूशन फीस में बढ़ा सकती है। वैसे विभाग अध्यक्षों ने मौखिक तौर पर चर्चा की है। हालांकि सीयूईटी काउंसिलिंग से पहले फीस के संबंध में समिति को निर्णय लेना होगा। इसके तहत जून-जुलाई में बैठक हो सकती है।
विश्वविद्यालय के 28 विभागों में 120 से ज्यादा पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। 2022 से विश्वविद्यालय ने फीस नहीं बढ़ाई है। मगर इस बार वृद्धि करने की जरूरत है, क्योंकि 92 में से 38 बैकलाग और नियमित पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। इनके वेतन का भार विभागों पर आने लगा है। साथ ही छात्रवृत्ति की राशि भी समय पर नहीं मिल रही है। इस कारण भी कुछ विभाग अध्यक्षों ने मौखिक तौर पर कुलपति डॉ. रेणु जैन से फीस बढ़ाने की इच्छा जताई है। इसके विपरीत कुछ विभाग फीस में कटौती करने के बारे में विचार कर रही हैं। उनका तर्क है कि पाठ्यक्रम की सीटें नहीं भर पा रही हैं। बीते कुछ सालों में विद्यार्थियों ने फीस अधिक होने से पाठ्यक्रम बीच में छोड़ दिया है। वैसे फीस संबंधित किसी भी विभाग ने समिति के समक्ष अभी कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।
कुलपति ने विभाग अध्यक्षों को फीस के बारे में अप्रैल तक बताने को कहा है। प्रस्ताव आने के बाद समिति बैठक बुलाएगी। इसमें विभाग अध्यक्षों से राय लेने के बाद फीस में वृद्धि पर विचार करेंगे।
फीस समिति के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष मिश्रा का कहना है कि विभागों के प्रस्ताव आने के बाद बैठक होगी। वैसे राजभवन व राज्य शासन ने आठ से 10 फीसद वृद्धि करने की अनुमति दे रखी है। उन्होंने बताया कि काउंसिलिंग से पहले फीस पर निर्णय लिया जाएगा।


