देश के एकमात्र तुलसी मंदिर में विवाह के लिए लगाते हैं अर्जी, बताशे व गन्ने का लगाया जाता है भोग, मंदिर में दर्शन मात्र से पूर्ण होती है मनोकामना

जबलपुर। देवउठनी एकादशी के मौके पर नर्मदा के गौरीघाट तट पर स्थित देश के एकमात्र तुलसी मंदिर में अपार जनमेदिनी उमड़ी। यहां नारायण वल्लभा तुलसा रानी के श्रीविग्रह के पंचामृत मार्जन उपरांत विविध धार्मिक हुए।
ज्योतिषाचार्य पंडित अमित कालवे के मुताबिक जिन लोगों के विवाह नहीं हो रहे हैं वे लोगों को एकादशी के दिन मंदिर में जाकर दर्शन करना चाहिए। इससे विवाह शीघ्र होता है। विवाह बाधा निर्मूल होती है। इस मंदिर में बताशा और गन्ने का भोग लगाकर दर्शन करने से मनोकामना पूर्ण होती है।
बता दे कि गौरी घाट में पुराने थाने के सामने माता तुलसी मंदिर का निर्माण अमित कालवे ने कराया था। इस मंदिर में सुबह शाम माता तुलसी की आरती और पूजन होता है। जयपुर के किशनगढ़ से सवा फीट की मार्बल की माता तुलसी की मूर्ति अमित कालवे बनवाकर लाए थे और ज्येष्ठ पूर्णिमा 14 जून, 2022 को प्राणप्रतिष्ठा कराई थी।
इस मंदिर में एकादशी को माता तुलसी की विशेष पूजन-आरती और अर्चन किया जाता है। जब इस मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा हुई थी तब बनारस से विद्वान ब्राह्मण को बुलाया गया था।
बनारस से आए इन ब्राह्मणों ने पूरे विधि विधान से माता तुलसी की प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा करते हुए उस समय विशिष्ट संरचना की थी।

 

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