देवास। गुजरात के बनासकांठा में स्थित पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट से 20 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इनमें 5 से 8 वर्ष तक के मासूम बच्चे भी हैं। ये सभी मध्यप्रदेश के हरदा और देवास जिले के रहने वाले थे।
देवास के नेमावर घाट पर आज गुरुवार को 18 शवों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।
मृतको के नाम केशरबाई (50, लखन (24), सुनीता (20), राधा (11), रुकमा (8), अभिषेक (5), राकेश (30), लाली (25), किरण (5) पंकज (ठेकेदार) (35), गुड्डी बाई (30) विजय (17), अजय (16), कृष्णा (12), विष्णु (18), सुरेश (25), बबिता (30), धनराज (18) है।
बाकी दो शवों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट किया गया। इनमें से एक की पहचान लक्ष्मीबेन अनिल भाई नायक (50) निवासी हंडिया, जिला हरदा के रूप में हुई है। एक शव की पहचान बाकी है। ये शव अभी गुजरात में ही हैं।
ब्लास्ट में जान गंवाने वाले 18 लोगों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। नर्मदा घाट (नेमावर) पर शवों को मुखाग्नि दी गई। देवास के 9 मजदूरों के शव पहले उनके पैतृक गांव संदलपुर पहुंचे। ठेकेदार का शव खातेगांव पहुंचा। अंतिम दर्शन के बाद सभी शवों को नेमावर घाट लाया गया।
वहीं, हरदा के हंडिया के लोगों के शव गुजरात से सीधे नेमावर घाट लाए गए।
इस दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। पूरे इलाके में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों की आंखें नम हैं।
शवों को लेने प्रशासन टीम के साथ मंत्री नागर सिंह गुजरात गए थे। बुधवार सुबह देवास के 10 मजदूरों के शव उनके पैतृक गांव के लिए रवाना किए गए। बाकी शव पोस्टमॉर्टम के बाद भिजवाए गए।
खातेगांव और संदलपुर के लिए गुजरात से आ रहीं सभी एम्बुलेंस और उनके साथ चल रहे गुजरात प्रशासन की ओर से अश्विन सिंह राठौर, नायब तहसीलदार और उनकी टीम शाम 6 बजे दाहोद से निकलने की तैयारी में थी। इसी बीच एक एम्बुलेंस में तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद एम्बुलेंस बदली गई और शवों को रवाना किया गया।
वही, देवास जिले में एक साथ इतने शवों को आइस बॉक्स में रखने की सुविधा नहीं है। इसलिए सभी शवों को इंदौर एमवाय अस्पताल की मॉर्चुरी में रखा गया। गुरुवार सुबह इंदौर से शवों को संदलपुर ले जाया। परिजन ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शवों को नेमावर घाट भेजा गया।
वहीं, हरदा के हंडिया के परिवार के शवों को इंदौर से सीधे नेमावार घाट लाया गया। परिजन ने एम्बुलेंस में ही आखिरी शवों को देखा।

