इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में रिक्त बैकलाग और नियमित पदों के लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल किया जा है।
स्कूल ऑफ़ एजुकेशन में कई ऐसे शिक्षकों का चयन हुआ है, जो अयोग्य व अपात्र उम्मीदवार बताए गए है। सप्ताहभर में दूसरी बार इस विभाग में चयनित उम्मीदवार को लेकर शिकायत हुई है।
आरोप यह है कि जिस विषय का विज्ञापन में जिक्र नहीं था। उसमें डिग्री लेने वाले उम्मीदवार को साक्षात्कार में मौका दिया है।
फिलहाल विश्वविद्यालय पूरे मामले को दबाने में लगा है।
अनुसूचित जनजाति वर्ग में सहायक प्राध्यापक के दो पद विज्ञापित किए गए थे। जबकि, अनुसूचित जाति वर्ग में एक ऐसे उम्मीदवार का चयन किया गया है, जिसने एमएड की डिग्री स्पेशल एजुकेशन में विषय में पूरी की है और यह डिग्री एनसीटीई और यूजीसी के नियमों के अनुसार विश्वविद्यालय में शिक्षा विषय में सहायक प्राध्यापक पद की नियुक्ति के लिए मान्य नहीं है।
यही वजह है कि उक्त उम्मीदवार को राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय अरुणाचल प्रदेश ने भी शिक्षा विषय में सहायक प्राध्यापक पद की चयन प्रक्रिया मे अपात्र घोषित किया है।
वहीं, अन्य एसटी पद के लिए जिस उम्मीदवार का चयन किया गया है जिसका पीजी विषय विज्ञापन में उल्लेख नहीं किया था। सप्ताहभर पहले भी तीन उम्मीदवार को चयन करने को लेकर शिकायत की गई थी।
उस दौरान कुलपति डॉ. रेणु जैन ने जांच करने का आश्वासन दिया था। उम्मीदवारों के चयन में स्क्रूटनी कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे है। शिकायत में कमेटी के सदस्यों पर भी कार्रवाई के लिए जोर दिया है। राज्यपाल के अलावा उच्च शिक्षा विभाग में भी भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत पर जांच करने की मांग की है।
कुलपती डॉ. रेणु जैन ने कहा कि इन चयनित उम्मीदवारों को अभी नियुक्ति पत्र नहीं दिया है।

